इंडियन मार्केट ने पिछले कुछ सालों में शानदार ग्रोथ दिखाई है। इस तरह की ग्रोथ का अंदाजा एक्सपर्ट्स को भी नहीं था। PPFAS Asset Management Company के CIO और डायरेक्टर राजीव ठक्कर ने हाल में इस बारे में बताया। उन्होंने बताया कि 2005 में PPFAS ने अपने 25 साल पूरे किए थे। तब उन्होंने अंदाजा लगाया था कि 2030 तक कंपनी की PMS का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। लेकिन, आज PPFAS Asset Management Company करीब 38,000 करोड़ रुपये एसेट का प्रबंधन कर रही है। उन्होंने बताया कि इतनी ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद उन्हें नहीं थी। ठक्कर के साथ PPFAS MF के नील पारीख ने भी मनीकंट्रोल से बातचीत की। दोनों ने स्टॉक मार्केट को लेकर अपने एक्सपीरियंस सहित कई मसलों पर खुलकर चर्चा की।
आवाज लगाकर होता था शेयरों का ट्रांजेक्शन
ठक्कर ने कहा कि उन्होंने अपना ग्रेजुएशन तब पूरा किया था, जब मार्केट बूम पर था। यह हर्षद मेहता का पीरियड था। तब NSE की शुरुआत नहीं हुई थी। आवाज लगाकर शेयरों का ट्रांजेक्शन होता था और ओनरशिप के रूप में फिजिकल सर्टिफिकेट दिए जाते थे। उन्होंने कहा, "मैंने अपना प्रोफेशनल सफर मर्चेंट बैंकर से 1994 में शुरू किया था। 1996 तक आईपीओ मार्केट में सूखा शुरू हो गया था। फिर मैं गवर्नमेंट बॉन्ड्स में शिफ्ट हो गया, जहां 2003 तक रहा।"
दूसरों की बताई बातों पर शेयरों में निवेश खतरनाक
नील ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि घर में मैं मार्केट की बातें सुनकर बड़ा हुआ था। मुझे 2000-2001 का वह समय याद है जब डॉट कॉम बुलबुला फटा था। मैंने अपने पिता को तब बहुत दबाव में देखा था। मैंने 2004 में PPFAS में काम करना शुरू किया। पहले इंस्टीट्यूशनल डीलिंग में था। उसके बाद बिजनेस डेवलपमेंट में आ गया। अपनी शुरुआती ट्रेडिंग के बारे में उन्होंने बताया कि मैं बगैर ज्यादा सोचेसमझे सिर्फ कुछ टिप्स पर शेयर खरीद लेता था। मैं उन शेयरों में पैसे लगाता था, जिसके बारे में लोग कहते थे कि यह काफी ऊपर जाएगा। लेकिन, जल्द नुकसान होने के बाद दोबारा मैंने एसे नहीं किया।
कर्ज लेकर निवेश करना ठीक नहीं
ठक्कर ने ट्रेडिंग से जुड़े अपनी अपनी शुरुआती सीख के बारे में बताया कि उन दिनों फाइनेंस कंपनियां अपने फंड के बराबार अमाउंट कर्ज के रूप में लेती थी और उसे शेयरों में निवेश करती थीं। मार्केट गिरने पर उन्हें बड़ा लॉस होता था। मैंने कर्ज लेकर निवेश के रिस्क को समझा। मैने देखा कि कर्ज लेकर आप इक्विटी में लंबे समय तक पॉजिशन नहीं बनाए रख सकते हैं। मार्केट के अच्छा करने के बावजूद आपको पैसा निकाल लेना पड़ता है।
न्यू एज कंपनियों के प्रॉफिट का ट्रैक रिकॉर्ड नहीं
स्टार्टअप्स और न्यू एज कंपनियों के बारे में पूछने पर ठक्कर ने कहा कि हम Google, Microsoft और Amazon जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश करते हैं। लेकिन, कुछ साल बीत जाने और शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद भी न्यू एज कंपनियों के बिजनेस को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। उनके प्रॉफिट के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल है। हमें नहीं पता कि ये कंपनियां जिस पैसे के इस्तेमाल से सब्सिडाइज्ड रेट पर अपनी सेवाएं दे रही है, अगर वह पैसा आना बंद हो गया तो क्या होगा। हम निवेश करने से पहले प्रॉफिट के लिहाज से कंपनी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हैं।
इंडियन शेयरों का 10 साल में अच्छा प्रदर्शन
ठक्कर ने कहा कि पछले 10 साल में इंडियन शेयरों का प्रदर्शन विदेशी शेयरों के मुकाबले अच्छा रहा है। उन्होंने नोएडा टोल ब्रिज का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश की वजह से कंपनी को अपने ब्रिज पर टोल वसूलना बंद करना पड़ा। इससे उसका बिजनेस मॉडल बदल गया। एपल को खरीदने के एक महीने के अंदर Berkshire Hathaway ने इस कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया। इससे शेयर की कीमतें चढ़ गईं। हमने भी इसमें निवेश बढ़ाया। लेकिन, हमारे पास बहुत लंबे समय तक इसके शेयरों को रखने का धैर्य नहीं था। थोड़े समय में हमारा पैसा डबल हो गया। फिर हमने इसे बेच दिया।