Property rules: हर शख्स की जिंदगी का बड़ा सपना होता है अपना एक सपनों वाला घर खरीदना। एक आम मध्यमवर्गीय परिवार के लिए ये सबसे बड़े फाइनेंशियल फैसलों में से एक होता है। लेकिन एक गौर करने वाली बात ये है कि प्रॉपर्टी बाजार में सही जानकारी और दस्तावेजों की जांच-परख न होने की वजह से कई बार लोग धोखाधड़ी और ठगी का शिकार बन जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing - EOW) ने होम बायर्स के लिए एक जनहित एडवाइजरी जारी की है। ईओडब्ल्यू ने कहा है कि घर खरीदते समय सिर्फ उसकी सुंदरता या दृश्य को देखकर आकर्षित न हों,बल्कि उसके कानूनी कागजातों की गहराई से जांच जरूर करें।
सुंदर प्रॉपर्टी अच्छी है, पर वेरिफाइड प्रॉपर्टी सबसे बेहतर'
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जारी संदेश आम जनता को प्रॉपर्टी फ्रॉड से बचाने के लिए एक जरूरी चेतावनी है। ईओडब्ल्यू का कहना है कि एक खूबसूरत प्रॉपर्टी होना अच्छी बात है,लेकिन सही तरीके से वेरिफाइड प्रॉपर्टी होना उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण और सुरक्षित है। अक्सर बिल्डर या विक्रेता ग्राहकों को लुभावने लोकेशन्स और आकर्षक वादों में फंसा लेते हैं,लेकिन बाद में दस्तावेज अधूरे या अवैध निकलने पर खरीदार कानूनी पचड़ों में फंस जाते हैं। इस जोखिम से बचने के लिए ईओडब्ल्यू ने 7 बिंदुओं वाली एक जरूरी चेकलिस्ट शेयर की है, जिसे हर खरीदार को सौदे पर दस्तखत करने से पहले फॉलो करना चाहिए।
ये हैं EOW की 7-प्वाइंट चेकलिस्ट: प्रॉपर्टी डील से पहले इन्हें जरूर परखें
दिल्ली पुलिस EOW के मुताबिक कोई भी अचल संपत्ति या घर खरीदने का अंतिम फैसला लेने और पेमेंट करने से पहले इन 7 बातों की पुष्टि कर लेना अनिवार्य है:
1- स्वामित्व की पुष्टि: सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आप जिस व्यक्ति या कंपनी से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, वही वास्तव में उसका असली और कानूनी मालिक है।
2- टाइटल और डॉक्यूमेंट चेन की जांच: प्रॉपर्टी के मूल टाइटल पेपर्स और पुराने सभी ट्रांसफर डॉक्यूमेंट्स की पूरी कड़ी यानी डॉक्यूमेंट चेन का मिलान करें। इससे यह पता चलता है कि जमीन या मकान पहले किन-किन लोगों के पास रहा है।
3- स्वीकृत नक्शे और लाइसेंस का सत्यापन: संबंधित प्रोजेक्ट के सभी स्वीकृत लेआउट प्लान, निर्माण लाइसेंस और स्थानीय प्राधिकरणों से मिली जरूरी एनओसी व मंजूरियों की पूरी जांच करें।
4- मॉर्गेज और कानूनी विवाद की पड़ताल: यह जरूर पता लगाएं कि प्रॉपर्टी पर कोई बैंक लोन या Mortgage तो नहीं है। यह भी जांच लें कि वह जमीन किसी सरकारी अधिग्रहण की प्रक्रिया में या किसी अदालत में मुकदमेबाजी का हिस्सा तो नहीं है।
5- कानूनी विशेषज्ञ से लें सलाह: किसी भी कॉन्ट्रैक्ट, एग्रीमेंट टू सेल या सेल डीड पर साइन करने से पहले हमेशा किसी एक्सपर्ट, लीगल एक्सपर्ट या प्रॉपर्टी वकील से दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करवाएं।
6- सिर्फ बैंकिंग चैनलों से करें भुगतान: सौदे का पूरा लेनदेन चेक, एनईएफटी, आरटीजीएस या बैंक ड्राफ्ट जैसे आधिकारिक बैंकिंग माध्यमों से ही करें। नकद भुगतान से बचें ताकि भविष्य में भुगतान का पक्का सबूत रहे।
7- कब्जे से पहले दस्तावेज पूरे करें: घर का पजेशन लेने से पहले रजिस्ट्री, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट और दूसरे सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर लें।
साइबर या फाइनेंशियल फ्रॉड होने पर तुरंत यहां करें संपर्क
अगर किसी नागरिक के साथ प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई फ्रॉड या आर्थिक धोखाधड़ी होती है, तो वे सीधे दिल्ली पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा कार्यालय (Economic Offences Wing, PS Mandir Marg Complex, Mandir Marg, New Delhi-110001) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा ई-मेल के जरिए dcp-eow-dl@nic.in या cpdelhi@delhipolice.gov.in पर अपनी शिकायत भेजी जा सकती है। तत्काल पुलिस सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 112 और किसी भी फाइनेंशियल फ्रॉड की सूचना शेयर करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 14547 पर संपर्क किया जा सकता है।