दिल्ली में जारी होंगे 'भू-आधार’, जमीन के हर टुकड़े को मिलेगा 14 डिजिट का यूनीक नंबर

Bhu-Aadhaar: इस प्रोजेक्ट के लिए पहले 1.32 करोड़ रुपये एलोकेट किए गए थे। पश्चिमी दिल्ली जिले के तिलंगपुर कोटला गांव में एक पायलट प्रोजेक्ट पहले ही पूरा हो चुका है। भू-आधार से फर्जी लेन-देन और एक ही जमीन के कई बार रजिस्ट्रेशन जैसी समस्याओं पर प्रभावी रूप से रोक लगेगी

अपडेटेड Feb 16, 2026 पर 2:33 PM
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यह कदम दिल्ली के लैंड रिकॉर्ड्स को आधुनिक बनाने और लोगों को लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों से राहत दिलाने की कोशिश का हिस्सा है।

दिल्ली सरकार ने शहर में ‘भू-आधार’ कार्ड जारी करने की पहल की है। इसके तहत हर भू-खंड के लिए 14 अंकों का एक खास नंबर जारी किया जाएगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि इस कदम का उद्देश्य जमीन की सीमाओं से जुड़े विवादों को खत्म करना है। उन्होंने बताया कि ड्रोन सर्वे और हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग के जरिए दिल्ली का नया डिजिटल लैंड मैप तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भू-आधार प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया विजन को साकार करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

यूनीक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) को ‘भू-आधार’ नाम दिया गया है। वर्ष 2021 में केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तहत इसे शुरू किया गया था। दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह कदम दिल्ली के लैंड रिकॉर्ड्स को आधुनिक बनाने और लोगों को लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों से राहत दिलाने की कोशिश का हिस्सा है।

CMO के अनुसार, ULPIN के इंप्लीमेंटेशन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की IT शाखा को सौंपी गई है। इस शाखा को भारतीय सर्वेक्षण विभाग का सहयोग मिलेगा। बयान में कहा गया है कि दिल्ली के सभी क्षेत्रों के लिए सटीक ULPIN तैयार करने को लेकर भारतीय सर्वेक्षण विभाग से लगभग दो टेराबाइट के उच्च गुणवत्ता वाले ‘‘जियोस्पेशियल डेटा और ड्रोन बेस्ड ऑर्थो रेक्टिफाइड इमेज’’ (ORI) प्राप्त की जा रही हैं। इन क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत पहले से शामिल 48 गांव भी हैं।


तिलंगपुर कोटला गांव में पायलट कंप्लीट

बयान के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए पहले 1.32 करोड़ रुपये एलोकेट किए गए थे। प्रोजेक्ट का फाइनेंशियल मैनेजमेंट IT शाखा कर रही है। पश्चिमी दिल्ली जिले के तिलंगपुर कोटला गांव में एक पायलट प्रोजेक्ट पहले ही पूरा हो चुका है। यहां 274 ULPIN रिकॉर्ड सफलतापूर्वक जनरेट किए गए हैं। अब सरकार एक मानक संचालन प्रक्रिया और तय समयसीमा के तहत चरणबद्ध तरीके से पूरे दिल्ली में इस प्रणाली का विस्तार करेगी। CMO के अनुसार, भू-आधार से जमीन के मालिकाना हक में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। विभिन्न सरकारी विभागों के बीच जमीन संबंधी आंकड़ों को लेकर कोऑर्डिनेशन आसान होगा। साथ ही फर्जी लेन-देन और एक ही जमीन के कई बार रजिस्ट्रेशन जैसी समस्याओं पर प्रभावी रूप से रोक लगेगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि इस कदम से लोगों को सुविधा मिलेगी और अब जमीन के मालिकाना हक को साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत नहीं होगी। बल्कि एक ही नंबर से संपत्ति की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

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