करीब दो साल से ज्यादा समय के बाद कंपनियां फिर से अपने कर्मचारियों को ऑफिस बुला रही हैं। इससे घर से ऑफिस का काम (WFH) कर रहे एंप्लॉयीज अब उन शहरों में लौटने लगे हैं, जहां उनके ऑफिसेज हैं। इस वजह से बेंगलुरु, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में घर की मांग बढ़ गई है। मांग बढ़ने से घरों का किराया बढ़ गया है। NoBroker की स्टडी से यह जानकारी मिली है। नोब्रोकर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो लोगों को किराए के घर तलाशने में मदद करता है।
नोब्रोकर की स्टडी के मुताबिक, बड़े शहरों में घरों के रेट करीब 12 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ज्यादा संख्या में एंप्लॉयीज के काम पर लौटने से डिमांड और सप्लाई के बीच गैप हो गया है। कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद ज्यादातर एंप्लॉयीज अपने घर लौट गए थे। तब बड़ी संख्या में घर खाली हो गए थे। फिर से वे ऑफिस से काम करने जा रहे हैं। इसके अलावा करीब दो साल बाद कंपनियों ने बड़ी संख्या में नई भर्तियां भी की हैं।
नोब्रोकर की रिपोर्ट में कहा गया है, "अब तक घर से काम करे एंप्लॉयीज उन शहरों में लौट रहे हैं, जहां उनके ऑफिसेज हैं। लेकिन, कंस्ट्रक्शन में देरी की वजह से डिमांड और सप्लाई के बीच फर्क पैदा हो गया है। स्टडी में शामिल 78 फीसदी लोगों ने कहा है कि उन्हें अपनी पसंद की प्रॉपर्टी मिलने में दिक्कत हो रही है।"
स्टडी के मुताबिक, करीब 74 फीसदी लोगों ने Locality तय करने में सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा। 69.7 फीसदी लोगों ने बजट के हिसाब से Locality का चुनाव किया। 68.6 फीसदी ने वाटर सप्लाई को प्राथमिकता दी। 48.6 फीसदी लोगों ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूरी के आधार पर इलाके का चुनाव किया।
करीब 89 फीसदी लोगों ने कहा कि वे शहर में घर लेना चाहते हैं। सिर्फ 11 फीसदी लोगों ने कहा कि वे शहर के बाहर भी घर लेने पर विचार कर सकते हैं। 52.4 फीसदी लोगों ने कहा कि वे सोसायटी फ्लैट रेंट पर लेना चाहते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह सेफ्टी रही। 25 फीसदी लोगों ने इंडिपेंडेंट बिल्डिंग्स में घर लेने की इच्छा जताई। 71 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अपने वर्क सिटीज लौट चुके हैं। 54 फीसदी लोगों ने कहा कि वे शहर लौटने का प्लान बना रहे हैं।