बड़े शहरों में टूट रहा अपने घर का सपना, लाखों रुपये चुकाने के बावजूद किराए पर रहने को मजबूर हैं लोग

अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) की हिस्सेदारी 77 फीसदी है। इसके बाद पुणे का स्थान है, जहां 9 फीसदी प्रोजेक्ट्स लटके हुए हैं

अपडेटेड Aug 05, 2022 पर 5:05 PM
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म Anarock के मुताबिक, इंडिया के बड़े शहरों में 4.48 लाख लोग अपना घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

इंडिया में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट (Real Estate Projects) में देर आम समस्या है। लेकिन, इस समस्या ने पहले कभी इतना गंभीर रूप धारण नहीं किया था। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म Anarock के मुताबिक, इंडिया के बड़े शहरों में 4.48 लाख लोग अपना घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। एक तरफ वे बैंकों (Banks) को होम लोन की EMI चुका रहे हैं तो दूसरी तरफ घर का किराया (House Rent) भर रहे हैं। तेजी से बढ़ती महंगाई के बीच घर के लिए दो तरह के खर्च ने उनकी कमर तोड़ दी है।

अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) की हिस्सेदारी 77 फीसदी है। इसके बाद पुणे का स्थान है, जहां 9 फीसदी प्रोजेक्ट्स लटके हुए हैं। अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद (तीनों मिलाकर) की हिस्सेदारी 7 फीसदी है। कोलकाता में ऐसे प्रोजेक्ट्स सिर्फ 7 फीसदी हैं।

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डेवलपर्स अधूरे प्रोजेक्ट्स के लिए पैसे की कमी का रोना रोते हैं। उनका कहना है कि काम शुरू करने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैसे की कमी की वजह यह है कि उन्होंने पैसे का दुरुपयोग किया है। RERA लागू होने से पहले डेवलपर्स खुलकर ऐसा करते थे। वे ग्राहकों से लिए गए पैसे का इस्तेमाल नई जमीन खरीदने या नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने के लिए करते थे। यही वजह है कि अधूरे प्रोजेक्ट्स में ऐसे प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी ज्यादा है, जो रेरा से पहले के हैं।

मनीकंट्रोल ने मुंबई, बेंगलुरु और एनसीआर के ऐसे कुछ हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के ग्राहकों से स्थिति का जायजा लेने की कोशिश की है, जो अधूरे प्रोजेक्ट्स की वजह से बहुत परेशान हैं।

रनवाल सैंक्चुअरी, मुंबई

इस प्रोजेक्ट के करीब 100 खरीदार पिछले 15 साल से अपना अपार्टमेंट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से कई ने 2005 और 2009 के बीच फ्लैट बुक किए थे, जब उनकी उम्र 50 साल और 60 साल से ऊपर थी। इस प्रोजेक्ट में देर की वजह प्लॉट को लेकर विवाद है। अथॉरिटीज का कहना है कि यह इस प्रोजेक्ट का प्लॉट फॉरेस्ट लैंड है।

राज टेरेस, मुंबई

घोड़बंदर रोड पर स्थित इस प्रोजेक्ट में 100 से ज्यादा लोगों ने फ्लैट खरीदे हैं। 2014 में लॉन्च होने के बावजूद अब तक यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। डेवलपर के वित्तीय संकट में फंस जाने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम रुक गया। कुछ ग्राहकों ने महाराष्ट्र रेरा में शिकायत की है, लेकिन डेवलपर ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।

पवेलियन, बेंगलुरु

इस प्रोजेक्ट में करीब 100 लोगों ने फ्लैट की बुकिंग कराई थी। कुछ ने अपार्टमेंट के लिए 1 करोड़ रुपये तक चुकाए हैं। 2014 में लॉन्च इस प्रोजेक्ट के पूरे होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। डेवलपर ने सिर्फ दो साल में प्रोजेक्ट पूरा करने का दावा किया था। ग्राहकों ने कर्नाटक रेरा, राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

एनसीआर में प्रोजेक्ट की स्थिति और बेहाल

नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुड़गांव में हालात और भी खराब हैं। यहां समस्या सिर्फ यूनिटेक, आम्रपाली और जेपी ग्रुप तक सीमित नहीं है। इनके नाम सिर्फ इसलिए सुर्खियों में रहे हैं, क्योंकि इनका मामला कोर्ट में पहुंच चुका है। CAG ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में नोएडा में जमीन आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात कही थी। उसने बिल्डर और सरकारी अधिकारियों के बीच मिलीभगत के बारे में भी संकेत दिया था। इसके चलते 2005 से 2014 के बीच सरकारी खजाने को 55,000 करोड़ रुपये का लॉस हो चुका है।

ताशी होम्स, गुरुग्राम

यह प्रोजेक्ट 110ए और 111 में स्थित है। यह 2010 में लॉन्च हुआ था। करीब 475 लोगों ने इसमें फ्लैट बुक कराया था। इनमें सिविलियन के साथ ही मिलिट्री के लोग भी शामिल हैं। डेवलपर ने 2016 में प्रोजेक्ट पर काम रोक दिया। कुछ ग्राहकों की शिकायत पर पिछले पांच साल से कंज्यूमर कोर्ट में मामले पर सुनवाई चल रही है। इस महीने फैसला आने वाला है।

अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, नोएडा

यह प्रोजेक्ट 2010 में शुरू हुआ था। डेवलपर ने तीन साल में फ्लैट देने का वादा किया था। ग्राहकों से करोड़ों रुपये वसूलने के बाद भी अब तक एक फ्लैट भी हैंडओवर नहीं किया गया है। ग्राहकों की शिकायतों पर नोएडा पुलिस ने मामले की जांच करने के बाद कहा है कि कंपनी के अधिकारियों ने पैसे का दुरुपयोग किया है। करीब 1,800 ग्राहकों ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन, उन्हें उचित अथॉरिटी के पास जाने को कहा गया।

रिज रेजीडेंसी, नोएडा

135 सेक्टर स्थित यह प्रोजेक्ट 2010 में शुरू हुआ था। बिल्डर ने नोएडा अथॉरिटी से लीज पर जमीन ली थी। लेकिन, उसने 2019 में कंस्ट्रक्शन रोक दिया। उसने 2015 में 9 टावर में 646 यूनिट्स की डिलीवरी की है। लेकिन, अब भी 850 ग्राहक अपना घर मिलने की राह देख रहे हैं।

अजनारा एंब्रोसिया, नोएडा

सेक्टर 118 स्थित यह प्रोजेक्ट 2014 में लॉन्च हुआ था। लेकिन, 8 साल बाद भी 1,600 से ज्यादा ग्राहक अपने फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ खरीदारों ने 2018 में यूपी रेरा में शिकायत की थी। 2021 में करीब 100 ग्राहकों ने एनसीएलटी में जाने का फैसला किया।

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