सरकार Competition Act, 2002 में बदलाव करने जा रही है। इसके लिए उसने संसद में The Competition (Amendment) Bill, 2022 पेश किया है। संशोधन बिल पारित होने के बाद Competition Commission of India (CCI) के अधिकार बढ़ जाएंगे। साथ ही इसके कई फायदे भी होंगे। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
संशोधन विधेयक संसद में पारित होने के बाद एंटी-कंपटिटिव एंग्रीमेंट का दायरा बढ़ जाएगा। विलय और अधिग्रहण के प्रस्तावों को जल्द मंजूरी मिल सकेगी। विवादित मामलों की संख्या में कमी आएगी। सीसीआई की जांच के दौरान अगर पार्टी इंफॉर्मेशन देने को तैयार हो जाती है तो उस पर कम पेनाल्टी लगाई जाएगी।
सरकार सीसीआई के अधिकार बढ़ाना चाहती है। इससे किसी खास सेक्टर में कंपनी की अपनी दमदार स्थिति का नाजायज फायदा उठाने की कोशिशों पर रोक लगाना आसान हो जाएगा। कानून लागू होने के बाद प्रतियोगिता का दम घोंटने और उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप में पेनाल्टी 1 करोड़ रुपये से बढ़कर 5 करोड़ रुपये हो जाएगी।
मनीकंट्रोल ने संशोधन विधेयक की कॉपी देखी है। इसमें कहा गया है कि इंडियन मार्केट की ग्रोथ और अलग-अलग तरह के नए बिजनेस मॉडल के आ जाने के बाद Competition Act, 2002 में संसोधन जरूरी हो गया था। संशोधन विधेयक को 5 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया। इसे 8 अगस्त से शुरू होने वाले हफ्ते में राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
अब अगर ट्रांजेक्शन की वैल्यू 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है तो नियंत्रण, शेयर, वोटिंग राइट्स आदि हासिल करने वाली कंपनी के लिए CCI का एप्रूवल हासिल करना जरूरी होगा। अगर बायर कंपनी डील के बारे में CCI को अप्लिकेशन के जररिए बता देती है तो फिर वह बगैर किसी बाधा के ओपन ऑफर लॉन्च कर सकेगी या शेयर या कनवर्टिबल डिबेंचर्स खरीद सकेगी।
नए नियम लागू होने के बाद विलय और अधिग्रहण के एसेसमेंट में लगने वाला समय 210 दिन से घटकर 150 दिन रह जाएगा। संशोधन विधेयक में सीसीआई को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपने डायरेक्टर जनरल को जांच के दौरान डॉक्युमेंट्स और रिकॉर्ड जब्त करने की इजाजत दे सकता है। इसके लिए सीसीआई को दिल्ली के चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के पास जाना होगा।
डायरेक्टर जनरल हाई रैंक का अधिकारी होता है। वह आम तौर पर एंटी-कंपिटिटिव उल्लंघन की जांच करता है। वह पूछताछ में मदद के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों या पुलिस अफसरों की सेवाएं भी ले सकता है।
CCI ने हाल के महीनों में टायर और ड्रिंक बनाने वाले कंपनियों के साथ ही कई कंपनियों पर छापे मारे हैं। ये छापे इस संदेह पर मारे गए हैं कि इन कंपनियों ने एंटी-कंपिटिटिव प्रैक्टिसेज का उल्लंघन किया है।