Realty developer Supertech : रियल्टी डेवलपर सुपरटेक को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की दिल्ली बेंच ने दिवालिया (insolvent) घोषित कर दिया है। बकाया नहीं चुकाने पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) द्वारा दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया है। NCLT ने हितेश गोयल को दिवालिया समाधान प्रोफेशनल (IRP) नियुक्त किया है।
पहले से कई मुश्किलों से जूझ रही है कंपनी
कंपनी पहले से ही कई मुश्किलों से जूझ रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते अपने नोएडा के प्रोजेक्ट में दो अवैध टावरों को ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया से गुजर रही है। इसके अलावा कंपनी के एनसीआर में कई निर्माणधीन प्रोजेक्ट हैं।
होमबायर्स के वकील ने कहा, जमा करें क्लेम फॉर्म
सुपरटेक के विभिन्न प्रोजेक्ट्स के 1,500 बायर्स का अदालतों में प्रतिनिधित्व कर रहे पीएसपी लीगल के पार्टनर आदित्य परोलिया ने कहा, “होमबायर्स को अब तुरंत नियुक्त IRP के पास अपने क्लेम फॉर्म फाइल करने चाहिए, जो कंपनी में उनके दावे का पता लगाएगा और वह कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (COC) का हिस्सा है। चूंकि, अब कंपनी से जुड़े सभी अहम फैसले COC की मंजूरी के बाद ही लिए जाएंगे। इससे होमबायर्स कंपनी के रिवाइवल में सहायक बनेंगे।”
NCLT के 17 मार्च के आदेश के मुताबिक, कॉरपोरेट डेटर द्वारा जमा किए गए एकमुश्त सेटलमेंट प्रपोजल को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने स्वीकार नहीं किया गया है। एनसीएलटी ने कहा था, “इसलिए, सुपरटेक के वकील ने कर्ज और डिफॉल्ट की बात को स्वीकार कर लिया था।” एनसीएलटी ने आदेश रिजर्व कर लिया था और शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया।
सुपरटेक ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ एनसीएलएटी (NCLAT) में अपील करेगा, क्योंकि यह मामला फाइनेंशियल क्रेडिटर्स से संबंधित है।
सुपरटेक के मैनेजमेंट ने एक बयान में कहा, “NCLT द्वारा सुपरटेक ग्रुप की कंपनियों में से एक में IRP की नियुक्ति के मामले में कंपनी इस आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील करेगी, क्योंकि यह मामला फाइनेंशियल क्रेडिटर्स से संबंधित है। होमबायर्स के हित में, बैंक को रिपेमेंट से ऊपर प्रोजेक्ट्स के निर्माण और डिलिवरी को तरजीह दी जानी चाहिए। बैंक को प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भी भुगतान किया जा सकता है। कंपनी के सभी प्रोजेक्ट्स वित्तीय रूप से ठीक हैं और किसी पक्ष या फाइनेंशियल क्रेडिटर को नुकसान की कोई संभावना नहीं है। ऑर्डर से सुपरटेक ग्रुप की किसी अन्य कंपनी का ऑपरेशन प्रभावित नहीं होगा।”
निर्माणाधीन परियोजनाओं पर नहीं होगा असर
होमबायर्स को भरोसा दिलाते हुए सुपरटेक ने दावा किया कि NCLT की कार्रवाई से उसकी कोई निर्माणाधीन परियोजना प्रभावित नहीं होगी।
कंपनी ने कहा, “हम अलॉटीज को यूनिट्स की डिलिवरी के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा पिछले सात साल के दौरान 40,000 फ्लैट्स से ज्यादा की डिलिवरी का मजबूत रिकॉर्ड है। हम आगे भी मिशन कंप्लीशन- 2022 के तहत फ्लैट्स की डिलिवरी करते रहेंगे, जिसमें हमने दिसंबर, 2022 तक 7,000 यूनिट्स की डिलिवरी का लक्ष्य तय किया है।”