40 लाख रुपये का फ्लैट क्या अब सिर्फ सपना बन जाएगा? घर खरीदने वालों के लिए रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

कुछ साल पहले तक मिडिल क्लास परिवार 30-40 लाख रुपये के बजट में अपना घर खरीदने का सपना आसानी से देख लेते थे। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। बड़े शहरों में बढ़ती कीमतें, लग्जरी प्रोजेक्ट्स की भरमार और सस्ते घरों में घटता निवेश आम लोगों की टेंशन बढ़ा रहा है

अपडेटेड May 28, 2026 पर 2:50 PM
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कुछ साल पहले तक मिडिल क्लास परिवार 30-40 लाख रुपये के बजट में अपना घर खरीदने का सपना आसानी से देख लेते थे।

कुछ साल पहले तक मिडिल क्लास परिवार 30-40 लाख रुपये के बजट में अपना घर खरीदने का सपना आसानी से देख लेते थे। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। बड़े शहरों में बढ़ती कीमतें, लग्जरी प्रोजेक्ट्स की भरमार और सस्ते घरों में घटता निवेश आम लोगों की टेंशन बढ़ा रहा है।

नई रिपोर्ट बताती है कि रियल एस्टेट सेक्टर में रिकॉर्ड पैसा आ रहा है, लेकिन यह पैसा अफोर्डेबल हाउसिंग की बजाय महंगे फ्लैट्स और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में लगाया जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में 40 लाख रुपये तक का फ्लैट खरीदना मिडिल क्लास के लिए और मुश्किल हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो होम लोन के सहारे अपने पहले घर का सपना पूरा करना चाहते हैं।

ANAROCK Capital की रिपोर्ट के मुताबिक अगले 10 सालों में भारत का रियल एस्टेट सेक्टर करीब 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश खींच सकता है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह पैसा अफोर्डेबल हाउसिंग यानी कम कीमत वाले घरों तक नहीं पहुंच रहा।


40 लाख से कम वाले घरों की हिस्सेदारी तेजी से घटी

रिपोर्ट के अनुसार 2021 में 40 लाख रुपये से कम कीमत वाले घर कुल नए लॉन्च का करीब 26% थे। लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 10% रह गए हैं। वहीं दूसरी तरफ 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम और लग्जरी घर बाजार पर तेजी से कब्जा कर रहे हैं। आज नए लॉन्च होने वाले आधे से ज्यादा प्रोजेक्ट इसी कैटेगरी में आ रहे हैं। यानी बिल्डर्स और निवेशकों का फोकस अब आम लोगों की जरूरत से ज्यादा हाई-एंड प्रोजेक्ट्स पर है।

आखिर क्यों बढ़ रही है चिंता?

रिपोर्ट कहती है कि भारत में पैसे की कमी नहीं है। बैंक, REITs, प्राइवेट इक्विटी फंड, AIFs और बड़े निवेशक रियल एस्टेट में लगातार पैसा लगा रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि ज्यादातर निवेश मुंबई, NCR और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों और महंगे प्रोजेक्ट्स में जा रहा है। छोटे शहरों और अफोर्डेबल हाउसिंग को पर्याप्त फंडिंग नहीं मिल रही। ANAROCK Capital के CEO शोभित अग्रवाल के मुताबिक असली चुनौती अब पूंजी जुटाने की नहीं, बल्कि सही जगह तक पैसा पहुंचाने की है।

करोड़ों लोगों को चाहिए सस्ते घर

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अभी भी करीब 1 करोड़ घरों की कमी है। 2030 तक कम से कम 2.5 करोड़ अफोर्डेबल घरों की जरूरत पड़ेगी। लेकिन मौजूदा हालात को देखें तो सस्ते घरों की सप्लाई लगातार घटती जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास के लिए घर खरीदना और मुश्किल हो सकता है।

हजारों प्रोजेक्ट अभी भी अधूरे

देशभर में करीब 4.5 लाख अफोर्डेबल और मिड-इनकम घर अभी भी अधूरे पड़े हैं। इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए लगभग 55,000 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई है। सरकार का SWAMIH Fund अब तक करीब 58,600 घरों को पूरा कराने में मदद कर चुका है। वहीं नया SWAMIH Fund 2.0 करीब 1 लाख और घरों को पूरा कराने में मदद करेगा।

होम लोन का बाजार तेजी से बढ़ रहा

भारत का हाउसिंग फाइनेंस मार्केट 38 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का हो चुका है और 2030 तक इसके 77 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यानी लोग घर खरीदने के लिए लगातार लोन ले रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या भविष्य में आम आदमी के बजट में घर उपलब्ध रहेंगे?

अब रियल एस्टेट में नया दांव

रिपोर्ट के मुताबिक अब निवेशक सिर्फ घरों पर नहीं, बल्कि डेटा सेंटर, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और ऑफिस स्पेस पर भी बड़ा दांव लगा रहे हैं। भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2030 तक तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जबकि वेयरहाउस सेक्टर भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।

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