EPF निकासी नियम में बड़े बदलाव की तैयारी! हर 10 साल में निकाल सकेंगे पूरा पैसा, रिटायरमेंट तक नहीं करना होगा इंतजार

EPF Withdrawal Rule: सरकार EPF से हर 10 साल में पूरी या आंशिक निकासी की अनुमति देने पर विचार कर रही है। यह रिटायरमेंट तक इंतजार की जरूरत खत्म कर सकता है। जानिए निकासी नियमों में बदलाव के बारे में क्यों विचार कर रही है और इस पर एक्सपर्ट चेतावनी क्यों दे रहे हैं।

अपडेटेड Jul 16, 2025 पर 10:23 PM
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अभी रिटायरमेंट से पहले EPF की पूरी निकासी सिर्फ दो महीने बेरोजगार पर ही मुमकिन है।

EPF Withdrawal Rule: केंद्र सरकार EPF खाते से निकासी के नियमों में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। अब भविष्य निधि खाताधारकों (EPF subscribers) को हर 10 साल में एक बार अपनी पूरी जमा रकम या कुछ हिस्सा निकालने की इजाजत मिल सकती है। अभी नौकरीपेशा कर्मचारियों को पूरी रकम निकालने के लिए रिटायरमेंट तक इंतजार करना होता है।

हर दशक में पूरी निकासी?

दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने Moneycontrol को बताया कि केंद्र सरकार EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस प्रस्ताव के तहत सदस्य हर 10 साल में अपने खाते से रकम निकाल सकेंगे।


एक अधिकारी के मुताबिक, “हर सदस्य की जमा पूंजी (corpus) में हर दशक में इजाफा होता है। उन्हें यह तय करने की आजादी होनी चाहिए कि वे इसका इस्तेमाल कहां और कैसे करना चाहते हैं।”

फिलहाल क्या है नियम

अभी EPF से पूरी निकासी केवल दो स्थितियों में मुमकिन है- जब सदस्य रिटायर हो (आमतौर पर 58 वर्ष की उम्र में), या जब वह दो महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहा हो। इसके अलावा कुछ खास परिस्थितियों में EPF से आंशिक निकासी की इजाजत है।

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युवा कर्मचारियों को सहूलियत?

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो युवा सदस्य 30 या 40 साल की उम्र में भी अपनी पूरी EPF रकम निकाल सकेंगे। हालांकि, एक अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि सरकार केवल 60% तक निकासी की सीमा तय कर सकती है, न कि पूरी राशि की। यह विकल्प फिलहाल विचाराधीन है।

सरकार का मकसद क्या है?

एक अधिकारी के अनुसार, “पिछले डेढ़ साल में EPF से जुड़ी ज्यादातर नीतिगत ढील इस उद्देश्य से लाई गई हैं कि सदस्य अधिक लचीले और सुविधाजनक तरीके से अपने पैसे का इस्तेमाल कर सकें। 10-वर्षीय निकासी का प्रस्ताव भी इसी सोच का हिस्सा है।”

एक्सपर्ट की राय: फायदा या खतरा?

हालांकि, सभी एक्सपर्ट इस प्रस्ताव से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि यह स्कीम भले ही अल्पकालिक (short-term) राहत दे, लेकिन इससे EPF की मूल भावना कमजोर हो सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक, EPF का मकसद रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित फंड बनाना है, न कि अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करना।

Saraf and Partners में पार्टनर अक्षय जैन का कहना है, “ऐसे किसी भी प्रस्ताव के नियम और शर्तें बहुत सोच-समझकर बनाए जाने चाहिए, ताकि अल्पकालिक वित्तीय जरूरतें लंबी अवधि की सुरक्षा पर भारी न पड़ें।”

क्या फायदा होगा?

King Stubb & Kasiva में पार्टनर रोहिताश्व सिन्हा का मानना है कि PF की अधिक पहुंच से बाजार, खासकर रियल एस्टेट सेक्टर में तरलता (liquidity) बढ़ सकती है। इससे अर्थव्यवस्था और नौकरीपेशा दोनों को फायदा होगा।

लेकिन, सिन्हा ने यह भी जोड़ा कि बार-बार निकासी की छूट से भविष्य के लिए बचत में कमी आ सकती है। खासकर, जब जरूरत के समय पैसा खत्म हो चुका हो।

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IT सिस्टम बना सकता है अड़चन

एक्सपर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि ऐसे बदलाव लागू करने से पहले EPFO को अपनी IT इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना होगा। मौजूदा सिस्टम बार-बार के निकासी अनुरोध और प्रोसेसिंग के लिए सक्षम नहीं है। इससे गड़बड़ी और धोखाधड़ी का खतरा बढ़ सकता है।

निकासी में हालिया बदलाव

अभी EPF खातों से आंशिक निकासी की अनुमति कुछ विशेष जरूरतों के लिए ही होती है। जैसे कि आवास खरीद, इलाज, शिक्षा या शादी। लेकिन हाल ही में नियमों में ढील दी गई है।

जुलाई 2025 से सदस्य अब अपने EPF फंड का 90% तक हिस्सा जमीन खरीदने या घर बनाने के लिए निकाल सकते हैं। पहले यह सुविधा केवल उन्हीं को मिलती थी, जिन्होंने लगातार पांच साल तक खाते में योगदान किया हो, लेकिन अब यह सीमा घटाकर तीन साल कर दी गई है।

ऑटो-सेटलमेंट लिमिट बढ़ी

EPFO ने 24 जून को एक अधिसूचना जारी कर बताया कि एडवांस क्लेम के लिए बिना अतिरिक्त मंजूरी के ऑटो-सेटलमेंट की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है। इसका मकसद है कि सदस्य किसी आपात स्थिति में जल्दी फंड हासिल कर सकें।

EPF क्या है?

EPF भारत की एक प्रमुख रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसकी देखरेख EPFO करता है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों वेतन का एक हिस्सा योगदान करते हैं। इस जमा रकम पर ब्याज भी मिलता है। इसका मकसद रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अगर सरकार इस प्रस्ताव को लागू करती है, तो यह EPF के इतिहास में सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव साबित हो सकता है।

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