Public Provident Fund (PPF) interest rate revision: छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में तिमाही रिवीजन इस महीने के अंत में होगा। सरकार ने अप्रैल 2020 से पीपीएफ ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, एक समय पीपीएफ पर ब्याज 7.9% फीसदी मिलता था जिसे घटाकर 7.1% कर दिया गया। देश में 1 अप्रैल 2020 से पीपीएफ पर ब्याज दर 7.1% पर बनी हुई है। सरकार ने मार्च 2023 में आखिरी बार छोटी बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी, तब से ऐसी उम्मीदें हैं कि सरकार लगभग 3 सालों के बाद पीपीएफ की ब्याज दर में बढ़ोतरी करेगी।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार पीपीएफ ब्याज दर में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होने का एक कारण यह है कि इस योजना से टैक्स के बाद रिटर्न अधिक है। उच्चतम (31.2%) टैक्स ब्रैकेट में करदाताओं के मामले में यह लगभग 10.32% है। इस तर्क को देखते हुए सरकार एक बार फिर पीपीएफ की ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं कर सकती है। हालांकि, फिर भी जमाकर्ता उम्मीद कर रहे हैं कि इस महीने के अंत में ब्याज दरों में रिवीजन करेगी।
पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) या पीपीएफ भारत में एक लंबी अवधि की निवेश योजना है। पीपीएफ योजना निवेशकों को 15 साल के पीरियड के लिए सालाना न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा करने की इजाजत देता है। पीपीएफ पर ब्याज दर सरकार तय करती है और इस पर अभी सालाना 7.1 फीसदी का ब्याज मिलता है।
पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इसका मतलब है कि निवेशक 15 साल तक इसमें से पैसा नहीं निकाल सकता। हालांकि, कुछ शर्तों को पूरा करने पर 50 फीसदी तक का पैसा भी निकाल सकते हैं। आपके पीपीएफ अकाउंट के खाता खोलने की तारीख से 5 साल पूरे होने के बाद निवेशक पीपीएफ खाते से कुछ पैसा निकाल सकते हैं। आप चौथे साल के खत्म होने पर अपने अमाउंट का 50 फीसदी पैसा निकाल सकते हैं।