ब्रोकर के रूप में शुरू किया था करियर, आज हैं एक म्यूचुअल फंड कंपनी के सीईओ, जानिए राजीव शास्त्री की दिलचस्प कहानी

शास्त्री ने अपना करियर असित सी मेहता फाइनेंशियल में बतौर ब्रोकर किया था। उन्हें फॉरेन-एक्सचेंज ब्रोकिंग डेस्क पर नियुक्त किया गया था। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में उनके सफर की शुरुआत Aditya Birla Sun Life Mutual Fund से हुई थी। तब A Balasubramanian इसके सीईओ और एमडी थी। शास्त्री को डेट डीलर की जिम्मेदारी दी गई थी। मैक्रोइकोनॉमिक्स में दिलचस्पी रखने वाले शास्त्री की पहली पसंद डेट रहा है

अपडेटेड Jun 26, 2023 पर 2:58 PM
शास्त्री ने बताया कि उनके शुरुआती दिनों में फिक्स्ड इनकम स्पेस में डील पूरी तरह से फोन पर होते थे। 80 के दशक के मध्य में यहीं स्थिति थी। स्क्रीन-बेस्ड ट्रेडिंग नहीं होने से तब ईमानदारी बहुत जरूरी होती थी। एक फंड मैनेजर रात में एक बजे डील करता था। फिर, वह सुबह में ऑफिस आता था और डील की एंट्री करता था। उसके बाद इसका सेटलमेंट होता था।

इंडिया में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ में कई लोगों की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन, ब्रोकर से करियर शुरू कर एक म्यूचु्अल फंड कंपनी का सीईओ बनने का मामला शायद ही दिखता है। हम बात कर रहे हैं कि राजीव शास्त्री की जो, NJ Mutual Fund के सीईओ हैं। यह इंडिया की नई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में से एक है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 4,300 करोड़ रुपये है। 51 साल के शास्त्री इंडियन म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को बहुत करीब से देखते रहे हैं। एएमसी के दूसरे सीईओ की तरह उनका बैकग्राउंड भी फिक्स्ड इनकम रहा है। वह बताते हैं कि कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड के नीलेश शाह और ट्रस्ट एमएफ के संदीप बागला इसके उदाहरण है।

पहली नियुक्ति फॉरेन-एक्सचेंज ब्रेकिंग डेस्क पर

शास्त्री ने अपना करियर असित सी मेहता फाइनेंशियल में बतौर ब्रोकर किया था। उन्हें फॉरेन-एक्सचेंज ब्रोकिंग डेस्क पर नियुक्त किया गया था। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में उनके सफर की शुरुआत Aditya Birla Sun Life Mutual Fund से हुई थी। तब A Balasubramanian इसके सीईओ और एमडी थी। शास्त्री को डेट डीलर की जिम्मेदारी दी गई थी। मैक्रोइकोनॉमिक्स में दिलचस्पी रखने वाले शास्त्री की पहली पसंद डेट रहा है। उन्होंने कहा, "मैक्रोइकोनॉमिक्स, डेट और फॉरेक्स मार्केट्स आपस में करीब रूप से जुड़े हुए हैं। कभी-कभी इक्विटी मार्केट की चाल मैक्रो सिचुएशंस से मेल नहीं खाती, लेकिन डेट मार्केट में कभी ऐसा देखने को नहीं मिलता।"


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डेट और इक्विटी मार्केट ने लंबा सफर तय किए हैं

शास्त्री ने बताया कि उनके शुरुआती दिनों में फिक्स्ड इनकम स्पेस में डील पूरी तरह से फोन पर होते थे। 80 के दशक के मध्य में यहीं स्थिति थी। स्क्रीन-बेस्ड ट्रेडिंग नहीं होने से तब ईमानदारी बहुत जरूरी होती थी। एक फंड मैनेजर रात में एक बजे डील करता था। फिर, वह सुबह में ऑफिस आता था और डील की एंट्री करता था। उसके बाद इसका सेटलमेंट होता था। आज स्थिति में नाटकीय बदलाव आया है। इक्विटी मार्केट में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा, "तुलनात्मक आधार पर वैल्यूएशन बहुत ज्यादा दिखती है। यही वजह है कि तब के मुकाबले आज इक्विटी फंड मैनेजर की अहमियत बहुत बढ़ी है।"

rajiv shastri profile

माता-पिता से मिली यह बड़ी सीख

शास्त्री बताते हैं कि उन्होंने माता-पिता से एक बड़ी बात यह सीखी की कभी पर्सनल लोन नहीं लेना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा आप हाउसिंग लोन ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत रूप से उन्होंने कभी लोन नहीं लिया। मैं और मेरे भाई ने हमेशा माता-पिता की इस सलाह का ध्यान रखा। अपने जीवन की किसी यादगार बात के बारे में पूछने पर वह बताते हैं कि एक बार वह बाजार की सलाह और दूसरे डेट फंड मैनेजर्स के उलट इंटरेस्ट रेट को लेकर दांव लगाया था। आखिर में इंटरेस्ट रेट को लेकर उनका दांव सही साबित हुआ था। यह बात 2000 के दशक की शुरुआत की थी।

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