इंटरेस्ट रेट्स का बढ़ना रियल एस्टेट शेयरों के लिए अच्छी खबर नहीं है। इसकी वजह यह है कि ग्राहकों की EMI बढ़ जाती है, जिसे चुकाने में उन्हें दिक्कत आती है। लेकिन, जमीनी हकीकत अलग है। लग्जरी रियल एस्टेट की मांग मेट्रो शहरों में बहुत स्ट्रॉन्ग है। एनालिस्ट और मैनेजमेंट की कमेंटी भी रियल एस्टेट को लेकर काफी बुलिश है। कुछ समय पहले इनवेस्टर्स रियल एस्टेट शेयरों में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। अब सेंटिमेंट में बदलाव दिख रहा है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का कहना है कि इनवेंट्री कम है, जिसके चलत रियल एस्टेट शेयरों की कीमतों में डबल डिजिट ग्रोथ दिखी है। इस सेक्टर के पक्ष में एक प्रमुख दलील यह है कि रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशन उनके पीक लेवल से कम है। जिसने भी 2008 में 'लैंड बैंक बूम' को देखा है, वह इस बात से सहमत होगा।
कंपनी ने पिछले हफ्ते कहा था कि उसने महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के लिए सबसे कम बोली लगाई है। यह जबलपुर में दो प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी है। दोनों प्रोजेक्ट्स 280-280 करोड़ रुपये के हैं। लेकिन, इस स्टॉक को लेकर मार्केट में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखी है। इसकी एक वजह यह है कि कंपनी के ज्वाइंट वेंचर के रूसी पार्टनर CJSC Transmashholding से रिश्ते खराब हो गए हैं। मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि TMH ज्वाइंट वेंचर में RVNL की ज्यादा हिस्सेदारी की मांग के लिए तैयार नहीं है। इसी वजह से इसने करीब 200 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा नहीं की है। यह बैंक गारंटी 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के डिब्बों को मैन्युफैक्चर करने और मेंटेन करने के लिए जरूरी है। RVNL नए खबर को सही नहीं बताया था। लेकिन, स्टॉक की कीमतों को देखने पर हकीकत का पता चलता है।
एक बार फिर इस स्टॉक में तेजी दिख रही है। सवाल है कि क्या इस बार लंबी अवधि के निवेशक भाग्यशाली रहेंगे? पिछले साल इस स्टॉक में 60 फीसदी तेजी आई। इनवेस्टर्स इसलिए इस शेयर पर दांव लगा रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इंडिया में ईलेक्ट्रिक व्हीकल्स की डिमांड बढ़ने पर सबसे ज्यादा फायदा एक्साइड को होगा। लिथियम बैट्री बनाने के लिए कंपनी का प्लांट चालू होने वाला है। लेकिन, वे निवेशक जो इस स्टॉक को पिछले 10 साल से रखे हुए हैं, उनका रिटर्न करीब उतना ही रहा है, जितना बैंक एफडी का होता है। इस समय कुछ ही एनालिस्ट इस स्टॉक को लेकर बुलिश हैं। लेकिन, प्राइस टारगेट या तो पूरा हो गया है या पूरा होने के करीब है। इस स्टॉक पर सबसे ज्यादा बुलिश जेपी मॉर्गन रहा है। उसने इसके लिए 245 रुपये का टारगेट दिया है।
केमिकल सेक्टर को लेकर आउटलुक के बारे में अच्छी खबरें नहीं हैं। ग्लोबल डिमांड को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जून में चार यूरोपीय कंपनियों-Lanxess, Croda, K+S and Victrex ने इस साल के बाकी महीनों में प्रॉफिट आउटलुक को लेकर निराशाजनक अनुमान दिए हैं। अमेरिका में Cabot ने पूरे साल के अपने अनुमान को घटा दिया है। उसके ग्लोबल मार्केट में डिमांड में नरमी को इसकी वजह बताई है।