बैंक FD से ज्यादा ब्याज और 100% सरकारी गारंटी! जानें RBI की इस धांसू स्कीम के बारे में, जिसमें नहीं है पैसे डूबने का रिस्क

RBI Floating Rate Savings Bonds: क्या आप शेयर बाजार के जोखिम से बचकर अपने पैसे पर गारंटीड और बंपर रिटर्न चाहते हैं? भारतीय रिजर्व बैंक की 'फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स' स्कीम में बिना किसी ऊपरी सीमा के 100% सुरक्षित निवेश का मौका मिल रहा है। बैंक एफडी से अधिक ब्याज देने वाली इस सरकारी योजना का ब्याज दर फॉर्मूला क्या है? जानिए

अपडेटेड Aug 23, 2026 पर 12:50 PM
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यह भारत सरकार की ओर से आरबीआई द्वारा जारी की जाने वाली एक विशेष बचत योजना

RBI Floating Rate Savings Bonds: अगर आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर अपने पैसों पर सुरक्षित और बेहतर रिटर्न चाहते हैं, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की 'फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स' स्कीम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।

भारत सरकार द्वारा समर्थित होने के कारण इस स्कीम में आपका पैसा 100% सुरक्षित रहता है और डूबने का शून्य रिस्क होता है। बैंक एफडी की तुलना में अधिक ब्याज और सरकारी गारंटी के कारण यह योजना खासकर वरिष्ठ नागरिकों और सुरक्षित निवेश चाहने वाले निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है।

क्या हैं RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स?


यह भारत सरकार की ओर से आरबीआई द्वारा जारी की जाने वाली एक विशेष बचत योजना है। इसे 'फ्लोटिंग रेट' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें ब्याज दर निश्चित नहीं होती, बल्कि समय-समय पर बाजार के हिसाब से बदलती रहती है।

इश्यू जारीकर्ता: भारत सरकार (आरबीआई के माध्यम से)।

जोखिम की श्रेणी: शून्य (भारत सरकार की पूर्ण सुरक्षा)।

पात्रता: केवल भारतीय नागरिक और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इसमें निवेश कर सकते हैं। एनआरआई इसमें निवेश नहीं कर सकते।

ब्याज दर की गणना कैसे होती है?

आरबीआई के इन बॉन्ड्स की ब्याज दर एनएससी (NSC) की ब्याज दर से सीधी जुड़ी होती है। इस बॉन्ड पर ब्याज दर हमेशा NSC की दर + 0.35% होती है। सरकार हर 6 महीने में (1 जनवरी और 1 जुलाई) इसकी ब्याज दर की समीक्षा करती है और नया रेट लागू करती है। ब्याज का भुगतान हर 6 महीने में सीधे निवेशक के बैंक खाते में जमा (1 जनवरी और 1 जुलाई को) कर दिया जाता है। इसमें री-इन्वेस्टमेंट का विकल्प नहीं होता।

लॉक-इन पीरियड और प्री-मैच्योर विड्रॉल के नियम

इस स्कीम में निवेश करने से पहले इसके लॉक-इन नियमों को समझना बहुत जरूरी है:

सामान्य लॉक-इन पीरियड: इस बॉन्ड की कुल परिपक्वता 7 साल की होती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए ढील:

  • 60 से 70 वर्ष की आयु वाले निवेशक 6 साल बाद पैसा निकाल सकते हैं।
  • 70 से 80 वर्ष की आयु वाले निवेशक 5 साल बाद पैसा निकाल सकते हैं।
  • 80 वर्ष से अधिक आयु के निवेशक 4 साल बाद ही पैसा निकाल सकते हैं।

कितना कर सकते हैं निवेश?

न्यूनतम निवेश: ₹1000 (और ₹1000 के गुणक में)।

अधिकतम निवेश: निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। आप जितना चाहें उतना पैसा इसमें सुरक्षित लगा सकते हैं।

टैक्स के नियम

इस बॉन्ड से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्स योग्य होता है। ब्याज से होने वाली कमाई को आपकी कुल आय में जोड़ा जाएगा और आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। अगर एक वित्तीय वर्ष में कुल ब्याज ₹10,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक है, तो बैंक/आरबीआई इस पर TDS काटेगा।

बैंक FD से ज्यादा ब्याज और 100% सरकारी गारंटी! जानिए RBI की इस धांसू स्कीम का पूरा सच, जहां नहीं है डूबने का रिस्क

कैसे और कहां से खरीदें ये बॉन्ड्स?

आप इन बॉन्ड्स को किसी भी प्रमुख सरकारी बैंक (जैसे- SBI, PNB) या चुनिंदा प्राइवेट बैंकों (जैसे- HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank) की शाखाओं अथवा उनकी नेट बैंकिंग/मोबाइल ऐप से ऑनलाइन खरीद सकते हैं। यह बॉन्ड डिजिटल रूप में 'बॉन्ड लेजर अकाउंट' (BLA) के तहत आरबीआई के पास जमा रहता है। इन बॉन्ड्स को किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता और न ही इन्हें गिरवी रखकर बैंक से लोन लिया जा सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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