Personal Loan: इस साल यानी 2025 में पर्सनल लोन की ब्याज दरों में हल्की राहत देखने को मिली है। साल की शुरुआत से अब तक रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती हो चुकी है, जिससे बैंकों के लिए फंड जुटाना सस्ता पड़ा है। इसके साथ ही फंडिंग और ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होने का असर भी लोन दरों पर दिखा है।
नतीजा यह है कि अब कई बैंक पर्सनल लोन की शुरुआती ब्याज दरें 9.75 प्रतिशत से 9.99 प्रतिशत सालाना के आसपास ऑफर कर रहे हैं।
जनवरी के मुकाबले अब कितनी बदलीं दरें
2025 की शुरुआत में ज्यादातर बैंकों में पर्सनल लोन की शुरुआती दरें 10.5 प्रतिशत या उससे ऊपर थीं। लेकिन अब कई पब्लिक और प्राइवेट बैंकों ने अपनी दरों में कटौती की है। कुछ बैंकों ने तो करीब 2 प्रतिशत तक ब्याज घटाया है, जो पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन के लिए बड़ा बदलाव माना जाता है।
पर्सनल लोन की शुरुआती ब्याज दर
इस तुलना से साफ है कि 2025 में पर्सनल लोन पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हुआ है और अब 9.9 प्रतिशत के आसपास की दरें आम हो रही हैं।
2025 में मौजूदा पर्सनल लोन ब्याज दरें
अब कई बैंक पहले के मुकाबले काफी कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन ऑफर कर रहे हैं। नीचे टेबल में अलग-अलग बैंकों की पर्सनल लोन की ब्याज दरें और प्रोसेसिंग फीस दी गई हैं। ये दरें बैंक, ग्राहक की प्रोफाइल और क्रेडिट स्कोर के हिसाब से बदल सकती हैं।
सोर्स: Bank Bazaar (दिसंबर 2025 अपडेट)
पर्सनल लोन की ब्याज दर कैसे तय करते हैं बैंक
पर्सनल लोन की ब्याज दर तय करते समय बैंक कई फैक्टर्स को देखते हैं। इसमें सबसे अहम होता है ग्राहक का क्रेडिट स्कोर, उस पर पहले से कितना कर्ज है, इनकम कितनी स्थिर है और वह किस तरह की नौकरी या एम्प्लॉयर से जुड़ा है। इसके अलावा बैंक अपनी फंडिंग कॉस्ट और ऑपरेटिंग खर्च को भी ध्यान में रखते हैं।
पर्सनल लोन में MCLR और रेपो लिंक क्यों नहीं
पर्सनल लोन को बैंक ज्यादा जोखिम वाला मानते हैं, क्योंकि यह अनसिक्योर्ड होता है। इसी वजह से ज्यादातर बैंक इसमें MCLR या RLLR की बजाय रिस्क-बेस्ड प्राइसिंग अपनाते हैं। पर्सनल लोन की अवधि भी आमतौर पर छोटी होती है, जो 1 से 5 साल के बीच रहती है।
RBI ने कई रिटेल फ्लोटिंग रेट लोन को रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य किया है। लेकिन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे अनसिक्योर्ड लोन को इससे छूट दी गई है।
फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन ज्यादा लोकप्रिय क्यों हैं
फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन में समय के साथ ब्याज दर बदल सकती है, क्योंकि ये BPLR यानी बेस रेट से जुड़े होते हैं, जो बैंक की लागत के हिसाब से बदलता है। इसके बावजूद भारत में ज्यादातर लोग फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन को ही पसंद करते हैं।
वजह साफ है- EMI में निश्चितता। पहले से ही ऊंची ब्याज दरों वाले पर्सनल लोन में लोग जोखिम नहीं लेना चाहते और बैंक भी अपने मार्जिन सुरक्षित रखने के लिए फिक्स्ड रेट को तरजीह देते हैं।