आरबीआई ने मई 2017 और मार्च 2020 के बीच जारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) के तय समय से पहले रिडेम्प्शन के कैलेंडर रिलीज कर दिया है। केंद्रीय बैंक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की 30 किस्तों का रिडेम्प्शन 11 अक्टूबर, 2024 से 1 मार्च, 2025 के बीच करेगा। आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक, निवेशक इश्यू की तारीख के 5 साल बाद अपने बॉन्ड का रिडेम्प्शन कर सकते हैं। निवेशक रिसीविंग ऑफिसेज, एनएसडीएल, सीडीएसएल या आरबीआई रिटेल डायरेक्ट के जरिए रिडेम्प्शन के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
8 साल में मैच्योर होता है एसजीबी
एसजीबी (SGB) की किस्त सरकार की तरफ से आरबीआई जारी करता है। एसजीबी फिजिकल गोल्ड में निवेश का अच्छा विकल्प है। निवेशक इश्यू प्राइस पर एसजीबी में निवेश करते हैं। मैच्योरिटी के लिए सरकार कीमत तय करती है। यह कीमत तब चल रहे गोल्ड की कीमत के हिसाब से तय होती है। इस तरह निवेशक को गोल्ड की कीमतों में होने वाले इजाफा का फायदा होता है। इस कैपिटल गेंस पर उन्हें टैक्स भी नहीं चुकाना पड़ता है। निवेशक को सालाना 2.5 फीसदी इंटरेस्ट भी मिलता है। लेकिन, इंटरेस्ट के रूप में मिले पैसे पर टैक्स लगता है। एसजीबी 8 साल में मैच्योर हो जाता है।
यह भी पढ़ें: Gold Price Today: जन्माष्टमी के दिन सोना हुआ सस्ता, जानिए अपने शहर में सोना-चांदी के नए रेट
NSE और बीएसई में भी होती है एसजीबी की ट्रेडिंग
सरकार ने इस साल फरवरी के बाद से एसजीबी की नई किस्त जारी नहीं की है। इस साल 23 जुलाई को पेश बजट में सरकार ने गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी थी। उसके बाद गोल्ड की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। हालांकि, उसके बाद से कीमतों में रिकवरी आई है। एसजीबी की ट्रेडिंग स्टॉक मार्केट्स यानी एनएसई और बीएसई में भी होता है। निवेशक स्टॉक एक्सचेंज के जरिए भी एसजीबी में निवेश कर सकते हैं।