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RBI के लोन के नियम सख्त बना देने से क्या आपके लिए लोन लेना मुश्किल हो जाएगा?

RBI के डेटा बताते हैं कि अगस्त 2023 में पर्सनल लोन 33 फीसदी बढ़ा, जबकि क्रेडिट कार्ड आउस्टैंडिंग 30 फीसदी बढ़ा। ज्यादा रिस्क वेट का मतलब है कि बैंकों और एनबीएफसी को अब लोन देने के लिए ज्यादा पूंजी अलग करनी होगी। ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर लोन लेने वाला ग्राहक पैसे नहीं चुकाता है बैंक बड़ी मुसीबत में नहीं फंसे

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 17, 2023 पर 5:34 PM
RBI के लोन के नियम सख्त बना देने से क्या आपके लिए लोन लेना मुश्किल हो जाएगा?
आरबीआई के कदम का ज्यादा असर NBFC पर पड़ने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि उनके लिए फंड की कॉस्ट बढ़ जाएगी।

RBI पिछले कुछ समय में अनसेक्योर्ड कंज्यूमर लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड लोन में उछाल से चिंतित था। अब उसने बैंकों और एनबीएफसी के लिए ऐसे सभी लोन पर रिस्क वेट बढ़ा दिया है। ऐसे लोन देने की उनकी सीमा भी तय कर दी है। RBI के डेटा बताते हैं कि अगस्त 2023 में पर्सनल लोन 33 फीसदी बढ़ा, जबकि क्रेडिट कार्ड आउस्टैंडिंग 30 फीसदी बढ़ा। ज्यादा रिस्क वेट का मतलब है कि बैंकों और एनबीएफसी को अब लोन देने के लिए ज्यादा पूंजी अलग करनी होगी। ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर लोन लेने वाला ग्राहक पैसे नहीं चुकाता है बैंक बड़ी मुसीबत में नहीं फंसे। बैंकों और एनबीएफसी को अब उनके बोर्ड की तरफ से अलग-अलग लोन सेगमेंट के लिए तय की गई लिमिट का भी ध्यान रखना होगा। डिप्रसिएटिंग एसेट्स पर दिए गए टॉप-अप लोन को भी अब अनसेक्योर्ड लोन माना जाएगा।

सवाल यह है कि क्या आरबीआई के इस कदम से पर्सनल लोन लेना मुश्किल हो जाएगा? क्या इससे बैंक ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड की लिमिट भी घटा देंगे? क्या पर्नसल और कंज्यूमर लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ जाएंगे? RBI के रिस्क वेट बढ़ाने के बाद से मीडिया में चल रही खबरों ने ग्राहकों को चिंतित किया है। उनके मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। आइए ऐसे कुछ सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

लोन का इंटरेस्ट रेट तुरंत नहीं बढ़ेगा

कोटक म्यूचुअल फंड में सीनियर एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट शिबानी कुरियन ने कहा कि आरबीआई के इस कदम से लोन पर इंटरेस्ट रेट तुरंत नहीं बढ़ेगा। उन्होंने कहा, "इस कदम से कुछ लोन सेगमेंट की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। अभी ज्यादातर बड़े बैंकों और एनबीएफसी के पास पर्याप्त पूंजी है। उनके पास रेगुलेटरी लिमिट से ज्यादा कैपिटल है। इसलिए फिलहाल बैंकों को कैपिटल जुटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में बैंक पहले आरबीआई के कदम के संभावित असर की स्टडी करेंगे। उसके बाद वे तय करेंगे कि फंड की कॉस्ट में हुए इजाफा का बोझ वे ग्राहकों पर डालेंगे या नहीं।"

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