लोन रिकवरी में जोर-जबरदस्ती पर लगेगी रोक, RBI जल्द इश्यू करेगा गाइडलाइंस

अभी रिकवरी एजेंट्स और लोन रिकवरी से जुड़े व्यवहार को लेकर रेगुलेटेड एंटिटीज की अलग-अलग कैटेगरीज के लिए अलग-अलग निर्देश लागू होते हैं। केंद्रीय बैंक ने रिकवरी एजेंट्स के इस्तेमाल और लोन रिकवरी के दूसरे पहलुओं को रिव्यू करने का फैसला किया है

अपडेटेड Feb 06, 2026 पर 4:35 PM
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आरबीआई ने कहा है कि वह फाइनेंशियल सर्विसेज और प्रोडक्ट्स की मिस-सेलिंग को रोकने के लिए भी सख्त नियम बनाएगा।

लोन रिकवरी में बैंक और एनबीएफसी की मनमानी पर रोक लगेगी। आम लोगों के हित में आरबीआई इसके लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय बैंक कंज्यूमर प्रोटेक्शन के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस पेश करने वाला है। इसमें यह बताया जाएगा कि बैंक और एनबीएफसी लोन रिकवरी में किस तरह के तरीकों का इस्तेमाल करेंगी। केंद्रीय बैंक फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की मिस-सेलिंग को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाने जा रहा है।

RBI लोन रिकवरी के तौर-तरीकों पर गाइडलाइंस जारी करेगा

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 फरवरी को इस बारे में बताया। उन्होंने मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बनाए रखने का ऐलान किया। आरबीआई के नोट के मुताबिक, अभी रिकवरी एजेंट्स और लोन रिकवरी से जुड़े व्यवहार को लेकर रेगुलेटेड एंटिटीज की अलग-अलग कैटेगरीज के लिए अलग-अलग निर्देश लागू होते हैं। केंद्रीय बैंक ने रिकवरी एजेंट्स के इस्तेमाल और लोन रिकवरी के दूसरे पहलुओं को रिव्यू करने का फैसला किया है।


लोन रिकवरी में जोर-जबर्दस्ती पर लगेगी रोक 

एनालिस्ट्स का कहना है कि कंप्लायंस गाइडलाइंस इश्यू होने के बाद लोन देने वाले बैंकों और एनबीएफसी के लिए जिम्मेदारियां बढ़ जाएंगी। बी शंकर एडवोकेट्स एलएलपी के सीनियर एसोसिएट ग्रहिता अग्रवाल ने कहा, "लोन रिकवरी में जोर-जबर्दस्ती और अनफेयर सेल्स प्रैक्टिसेज को लेकर स्पष्ट बेंचमार्क तय होने से भविष्य में रिकवरी से जुड़े विवादों में कमी आएगी। लेंडर्स के लिए कंप्लायंस से संबंधित जिम्मेदारियां बड़ जाएंगी।"

फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की मिस-सेलिंग पर भी रोक लगेगी

आरबीआई ने कहा है कि वह फाइनेंशियल सर्विसेज और प्रोडक्ट्स की मिस-सेलिंग को रोकने के लिए सख्त नियम बनाएगा। बैंक काउंटर्स के जरिए बेचे जाने वाले थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स और सर्विसेज ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से होने चाहिए। ये इंडिविजुअल क्लाइंट्स के रिस्क लेने की क्षमता के भी मुताबिक होने चाहिए। आरबीआई ने कहा है, "रेगुलेटेड एंटिटीज की तरफ से फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की सेल्स एडर्टाइजिंग, मार्केटिंग और सेल्स को लेकर व्यापक निर्देश जारी किए जाएंगे।"

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बैंक अपने ग्राहकों को थर्ड पार्टी के प्रोडक्ट्स और सर्विसेज बेचते हैं

अभी बैंक अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ ही थर्ड पार्टी के प्रोडक्ट्स और सर्विसेज अपनी ब्रांच के जरिए बेचते हैं। उनका फोकस अपने ग्राहकों को ऐसे प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को बेचने पर होता है। इस पर उन्हें कमीशन मिलता है। कई बार वे ऐसे प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की बिक्री ऐसे ग्राहकों को कर देते हैं, जिन्हें उनकी कोई जरूरत नहीं होती है। इससे ग्राहक को नुकसान होता है, क्योंकि उनसे ऐसी सर्विसेज और प्रोडक्ट्स के लिए फीस वसूली जाती है।

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