Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की सबसे बेस्ट स्ट्रेटजी? NPS, EPF और एन्युटी पर समझिए एक्सपर्ट का ये मास्टर प्लान
Retirement planning Tips: क्या आप जानते हैं कि आज जो घर ₹50000 महीने में चल रहा है, 30 साल बाद उसके लिए ₹2.2 लाख प्रति महीने की जरूरत होगी? बढ़ती उम्र, मेडिकल महंगाई और 'लॉन्जिविटी रिस्क' पर पेंशनबाजार के हेड विश्वजीत गोयल ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। जानिए 30 की उम्र में निवेश शुरू न करने की भूल आपको कैसे भारी पड़ सकती है
आज के दौर में रिटायरमेंट से जुड़ा सबसे बड़ा जोखिम 'लॉन्जिविटी रिस्क' है
Retirement Planning Strategy: पहले रिटायरमेंट का फॉर्मूला बहुत सीधा और सरल हुआ करता था। 50-60 साल की उम्र तक काम करना और फिर अपनी जीवनभर की बचत के सहारे आगे का जीवन काटना। लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। लोगों की जीवन प्रत्याशा बढ़ी है और संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवारों का चलन बढ़ा है।
पेंशनबाजार के हेड विश्वजीत गोयल के अनुसार, प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद 25 से 30 सालों तक अपने खर्चों का इंतजाम करना एक बड़ी आर्थिक परीक्षा बन गया है। यही वजह है कि अब रिटायरमेंट प्लानिंग को नए सिरे से देखने की सख्त जरूरत है।
'लॉन्जिविटी रिस्क': अपनी ही बचत से ज्यादा जीने का खतरा
विश्वजीत गोयल बताते हैं कि आज के दौर में रिटायरमेंट से जुड़ा सबसे बड़ा जोखिम 'लॉन्जिविटी रिस्क' है। इसका मतलब है कि व्यक्ति की उम्र तो लंबी हो, लेकिन उसकी जमा-पूंजी और निवेश पहले ही खत्म हो जाएं। अध्ययनों के मुताबिक, औसतन लोग 39 साल की उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग सोचना शुरू करते हैं, जो कि काफी देर हो चुकी होती है।
अगर आप 30 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं, तो आपको 3 दशकों से ज्यादा समय तक कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। वहीं 40 की उम्र में शुरुआत करने पर उतना ही फंड जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
हेल्थकेयर और मेडिकल महंगाई का सबसे बड़ा बोझ
जैसे-जैसे औसत उम्र बढ़ रही है, स्वास्थ्य समस्याएं और अस्पताल के खर्चे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। पुरानी बीमारियों का लंबा इलाज, रूटीन चेकअप, स्पेशलिस्ट डॉक्टर की फीस और अचानक अस्पताल में भर्ती होने का खर्च रिटायरमेंट के पूरे बजट को बिगाड़ सकता है। मेडिकल इंफ्लेशन आम महंगाई से भी तेज रफ्तार से बढ़ रही है, जिससे निपटने के लिए अलग से मजबूत कॉर्पस जरूरी है।
महंगाई का छिपा हुआ खतरा
रिटायरमेंट फंड तय करते समय अक्सर लोग आज के खर्चों के हिसाब से गणना करते हैं, जो विश्वजीत गोयल के मुताबिक एक बड़ी भूल साबित होती है। अगर सालाना महंगाई दर 5% मान ली जाए, तो जिस परिवार का आज का मासिक खर्च ₹50,000 है। 15 साल बाद उसी लाइफस्टाइल के लिए ₹1.1 लाख प्रति महीना चाहिए होंगे। 30 साल बाद यह जरूरत बढ़कर ₹2.2 लाख प्रति महीना से अधिक हो जाएगी।
रिटायरमेंट के लिए 3 सबसे प्रमुख निवेश ऑप्शन
किसी एक प्रोडक्ट पर निर्भर रहने के बजाय पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना समझदारी है:
1- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): बाजार आधारित रिटर्न देने वाली यह सरकारी योजना रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने का शानदार माध्यम है। PFRDA के मुताबिक, NPS और APY के कुल सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा 9 करोड़ के पार पहुंच चुका है। कॉर्पोरेट NPS के जरिए नौकरीपेशा लोग इसे अपनी सैलरी स्ट्रक्चर का हिस्सा बना सकते हैं।
2- कर्मचारी भविष्य निधि (EPF): नौकरीपेशा लोगों के लिए यह एक पारंपरिक और सुरक्षित माध्यम है, जिसमें एंप्लॉयर और एंप्लॉय दोनों का योगदान होता है। हालांकि, केवल EPF के भरोसे पूरी रिटायरमेंट लाइफ का खर्च निकालना मुश्किल हो सकता है।
3- एन्युटी प्लान: रिटायरमेंट के समय एकमुश्त जमा राशि का इस्तेमाल गारंटीड मंथली पेंशन या नियमित आय पाने के लिए एन्युटी प्लान में किया जा सकता है।
पेंशनबाजार के हेड विश्वजीत गोयल का मानना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग अब कोई ऐच्छिक विकल्प नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी अनिवार्यता बन चुकी है। 30-40 साल लंबी रिटायरमेंट लाइफ को सम्मान, वित्तीय आजादी और मन की शांति के साथ जीने के लिए जितनी जल्दी हो सके सही एसेट एलोकेशन के साथ निवेश शुरू करना चाहिए।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।