जानिए किसने पहली बार बनाया समर ड्रिंक रूह अफजा, 115 साल पुराना है इतिहास

Humdard RoohAfza: रूह अफजा, जिसका उर्दू में मतलब है ‘आत्मा को फ्रेश करने वाला’। रूह अफ्जा एक ऐसा ड्रिंक है जो 115 सालों से चला आ रहा है। खासकर भारत, पाकिस्तान और बांग्ला देश में इसकी डिमांड सबसे ज्यादा है। रूह अफ्जा पर किसी भी तरह के अन्य ड्रिंक के कंपिटिशन का कोई असर नहीं पड़ा है

अपडेटेड May 24, 2023 पर 4:42 PM
रूह अफ्जा एक ऐसा ड्रिंक है जो 115 सालों से चला आ रहा है।

Humdard RoohAfza:  रूह अफजा, जिसका उर्दू में मतलब है ‘आत्मा को फ्रेश करने वाला’। रूह अफ्जा एक ऐसा ड्रिंक है जो 115 सालों से चला आ रहा है। खासकर भारत, पाकिस्तान और बांग्ला देश में इसकी डिमांड सबसे ज्यादा है। रूह अफ्जा पर किसी भी तरह के अन्य ड्रिंक के कंपिटिशन का कोई असर नहीं पड़ा है। गर्मियों में इन गरम देशों में ये सबसे पसंदीदा ड्रिंक है। लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि गाढ़ा, गुलाब के रंग का सिरप - जिसे शरबत कहा जाता है और पहले के समय में इसे एक लंबी गर्दन वाली बोतल से डाला जाता है। रूफ अफ्जा को को एक युवा हर्बलिस्ट हकीम अब्दुल मजीद ने बनाया था।

1883 में जन्मे हकीम अब्दुल मजीद ने यूनानी चिकित्सा पद्धति का अध्ययन किया और एक पारंपरिक चिकित्सा कारोबारी बन गए। 1906 में माजिद ने पुरानी दिल्ली में एक हर्बल दुकान खोलने का फैसला किया, जो तब ब्रिटिश शासन के अधीन था। यहीं पर उन्होंने एक दवाई तैयार की जो बहुत अधिक गर्मी के साथ आने वाली परेशानी जैसे डीहाईड्रेशन, हीट स्ट्रोक, दस्त में मदद करती है।

हकीम अब्दुल मजीद ने चीनी, जड़ी बूटियों और फूलों के अर्क को मिलाकर एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक बनाया। उन्होंने इसका नाम रूह अफजा रखा और यह ड्रिंक तुरंत हिट हो गया। प्राकृतिक फलों और जड़ी-बूटियों को मिलाकर बने इस ड्रिंक की बोतलें उनके छोटे दवा स्टोर की अलमारियों से तुरंत बिक जाती थी। उन्होंने बाद में इसका नाम हमदर्द रख दिया था।


1922 में 34 साल की उम्र में मजीद का निधन हो गया। हालांकि, तब उनकी पत्नी राबिया बेगम ने लीडर का रोल निभाया। उन्होंने हमदर्द को एक ट्रस्ट घोषित कर दिया और फैसला किया कि मुनाफे का ज्यादा हिस्सा लोक कल्याण के लिए लगाया जाएगा। इस फैसले ने बाद में उसके बेटों को हमदर्द को एक स्थायी और बड़े कारोबार में बदलने में कामयाब साबित हुआ।

1947 में जब भारत का विभाजन हुआ तो बेगम के बड़े बेटे हकीम अब्दुल हामिद वहीं रुके रहे और हमदर्द भारत की देखरेख की। उनके छोटे बेटे हकीम मोहम्मद सईद नए बने पाकिस्तान चले गए। उन्होंने हमदर्द पाकिस्तान के नाम से रूह अफजा का प्रोडक्शु शुरू कर दिया। 1971 के युद्ध के बाद नए बने बांग्लादेश में रूह अफजा बनाने वाली एक नई ट्रस्ट बनाई गई।

दिलचस्प बात यह है कि तीनों कारोबार स्वतंत्र हैं और हकीम अब्दुल मजीद के एकस्टेंडेड सदस्यों या दोस्तों के द्वारा चलाई जा रहे हैं। आज रूह अफज़ा गर्मियों के दौरान सबसे ज्यादा बिकता है क्योंकि यह शरीर के तापमान को कम करता है और एनर्जी को बढ़ाता है। रमजान के महीने में इसकी मांग सबसे अधिक होती है। हमदर्द इंडिया अपनी ओर से रूह अफजा योगर्ट ड्रिंक और रूह अफजा मिल्कशेक जैसे प्रोडक्ट शुरु करके अपने प्रोडक्ट में वैराइटी ला रहा है।

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