FD Interest Rates: फिक्स्ड डिपॉडिट यानी FD उन लोगों के लिए एक सीधा और सुरक्षित निवेश तरीका है, जो बिना ज्यादा जोखिम लिए तय और स्थिर रिटर्न चाहते हैं। सेविंग अकाउंट में पैसा रखने पर जितना ब्याज मिलता है, उससे ज्यादा आम तौर पर FD में मिलता है। इसमें आप एक तय रकम को बैंक में एक निश्चित समय के लिए जमा करते हैं और उस पर पहले से तय ब्याज दर मिलती है। अवधि 7 दिन से लेकर 10 साल तक हो सकती है। मैच्योरिटी पर आप पैसा निकाल सकते हैं या फिर नई FD में बदल सकते हैं।
FD खास तौर पर तब काम आती है जब आप किसी लक्ष्य के लिए बचत कर रहे हों, जैसे बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदना। कई बैंक ऐसी सुविधा भी देते हैं जिसमें हर महीने आपके खाते से तय रकम अपने आप कटकर FD में जमा हो जाती है।
निवेश से पहले अलग अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी है। आम तौर पर मिड टर्म यानी 1 से 3 साल की FD पर ज्यादा ब्याज मिलता है। सीनियर सिटीजन यानी 60 साल से ऊपर के लोगों को आम ग्राहकों से ज्यादा ब्याज दिया जाता है। अब देखते हैं देश के बड़े बैंकों की ताजा FD दरें।
State Bank of India (SBI)
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI में 2 साल से कम और 3 साल से कम अवधि की FD पर आम ग्राहकों को 6.45% और सीनियर सिटीजन को 6.95% ब्याज मिल रहा है। वहीं 5 साल से 10 साल तक की FD पर सीनियर सिटीजन को 7.05% और आम ग्राहकों को 6.05% मिल रहा है। दरें 15 जुलाई 2025 से लागू हैं।
देश का सबसे बड़ा प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक 18 महीने से कम और 3 साल से कम अवधि की FD पर सीनियर सिटीजन को अधिकतम 6.95% और आम ग्राहकों को 6.45% ब्याज दे रहा है। 5 साल से 10 साल तक की FD पर आम ग्राहकों को 6.15% और सीनियर सिटीजन को 6.65% मिल रहा है। दरें 17 दिसंबर 2025 से लागू हैं।
ICICI बैंक 3 साल से 5 साल की FD और 5 साल की टैक्स सेवर FD पर सीनियर सिटीजन को अधिकतम 7.10% ब्याज दे रहा है। आम ग्राहकों के लिए 3 साल से 10 साल तक की FD पर अधिकतम 6.50% ब्याज है। दरें 3 मार्च 2026 से लागू हैं।
प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक सीनियर सिटीजन को 3 साल से ज्यादा और 5 साल तक की FD पर अधिकतम 7.75% ब्याज दे रहा है। इस आर्टिकल में शामिल बड़े बैंकों में यह सबसे ऊंची दर है। वहीं आम ग्राहकों के लिए बैंक 1.5 साल से लेकर 5 साल से ज्यादा अवधि की FD पर अधिकतम 7.00% ब्याज दे रहा है। ये दरें 1 दिसंबर 2025 से लागू हैं।
कुल मिलाकर, FD में निवेश करते समय सिर्फ सबसे ज्यादा ब्याज दर देखना काफी नहीं है। अपनी जरूरत, निवेश की अवधि और लिक्विडिटी को ध्यान में रखकर फैसला लेना ज्यादा समझदारी भरा कदम होता है।