SEBI ने म्यूचुअल फंडों को छोटे शहरों के लिए इंसेंटिव स्ट्रक्चर का इस्तेमाल नहीं करने को कहा है। मार्केट रेगुलेटर का कहना है कि यह स्ट्रक्चर पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। इसके दुरुपयोग का खतरा है। सेबी ने म्यूचुअल फंड के जरिए फाइनेंशियल इनक्लूजन बढ़ाने और निवेशकों के हित में B-30 शहरों के इनवेस्टर्स के नए निवेश पर अतिरिक्त 30 बेसिस प्वॉइंट्स एक्सपेंस रेशियो चार्ज करने की इजाजत दी थी। 2 लाख रुपये तक के निवेश पर यह अतिरिक्त एक्सपेंस रेशियो चार्ज करने की इजाजत है। सेबी का मानना था कि इससे म्यूचुअल फंड हाउसेज को B-30 शहरों में अपने डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
म्यूचुअल फंड्स के डिस्ट्रिब्यूशन के मामले में B-30 का मतलब ऐसे शहरों से है, जो टॉप-30 शहरों की लिस्ट में नहीं आते हैं। टॉप-30 शहरों की लिस्ट में आने वाले शहरों को T-20 कहा जाता है। SEBI ने इस बारे में 24 फरवरी को एक लेटर जारी किया था। Association of Mutual Funds in India (AMFI) ने 2 मार्च को यह लेटर म्यूचुअल फंड हाउसेज को फॉरवर्ड किया है। इसमें कहा गया है कि रेगुलेटर ने B-30 लोकेशंस में नए निवेश पर अतिरिक्त 30 बीपीएस एक्सपेंस रेशियो चार्ज करने के तरीके में कई गड़बड़ियां पाई हैं।
इन गड़बड़ियों और अनियमितता का संबंध ट्रांजेक्शंस स्पिलिटिंग, इनवेस्टमेंट चर्निंग और B-30 इंसेंटिव के कैलकुलेश से है। सेबी के लेटर में कहा गया है, "इंसेंटिव स्ट्रक्चर के दुरुपयोग को रोकने के लिए सिस्टम-आधारित मैकेनिज्म नहीं होना तय उद्देश्यों को हासिल करने में एक बड़ी बाधा है। इसलिए B-30 इंसेंटिल स्ट्रक्चर का इस्तेमाल तब तक रोका जा रहा है जब तक AMC सेबी की चिंताएं दूर करने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं बना लेते। उन्हें गड़बड़ी करने वालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की व्यवस्था भी बनानी होगी।"
एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को स्पिलिटिंग, इनवेस्टमेंट चर्निंग और दूसरे तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए सिस्टम आधारित व्यवस्था बनाने को कहा गया है। इससे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। इनमें एएमसी के इनटर्नल और MF डिस्ट्रिब्यूटर्स जैसे एक्सटर्नल डिस्ट्रिब्यूटर्स शामिल होंगे। AMFI ने म्यूचुअल फंड हाउसेज को B-30 इंसेंटिव मैकेनिज्म से जुड़े प्रोसेस को मजबूत बनाने को भी कहा है।