SEBI ने MF स्कीम के प्रदर्शन से उसकी फीस लिंक्ड करने का प्रस्ताव दिया, MF इंडस्ट्री में घबराहट

SEBI का प्रस्ताव अगर लागू होता है तो इसका मतलब है कि फंड हाउस तभी मैनेजमेंट फीस वसूल सकेंगे जब स्कीम का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर होगा। दरअसल, SEBI ने 18 मार्च को एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया था

अपडेटेड May 22, 2023 पर 3:53 PM
इनवेस्टर्स ने स्कीमों के खराब प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी। उसके बाद सेबी का यह प्रस्ताव आया है।

SEBI ने म्यूचुअल फंड हाउसेज की तरफ से वसूली जाने वाली फीस के बारे में एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसमें कहा गया है कि फंड हाउसेज की मैनेजमेंट फीस को बेंचमार्क के मुकाबले उनके प्रदर्शन से लिंक्ड किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में घबराहट है। सेबी ने अपनी स्टडी में पाया है कि सिर्फ 26.7 फीसदी एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी स्कीमों ने 28 फरवरी, 2023 को खत्म 5 साल के पीरियड में अपने बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है या उसके बराबर रिटर्न दिया है।

SEBI के इस प्रस्ताव का क्या मतलब है?

SEBI का प्रस्ताव अगर लागू होता है तो इसका मतलब है कि फंड हाउस तभी मैनेजमेंट फीस वसूल सकेंगे जब स्कीम का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर होगा। दरअसल, SEBI ने 18 मार्च को एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया था। इसमें प्रदर्शन आधारित फीस मॉडल की बात कही गई है। इनवेस्टर्स ने स्कीमों के खराब प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी। उसके बाद सेबी का यह प्रस्ताव आया है। स्कीम के प्रदर्शन से नाखुश कुछ इनवेस्टर्स ने पैसिव स्कीमों का रुख किया है। इनकी फीस भी कम होती है। इसमें फंड मैनेजर्स को किसी तरह का रिस्क लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। साथ ही बेचमार्क जितना रिटर्न हासिल करने की उम्मीद भी होती है।


यह भी पढ़ें : अगर आप 30 सितंबर तक 2000 रुपये के नोट डिपॉजिट या एक्सचेंज नहीं कर पाते हैं तो क्या होगा?

म्यूचुअल फंड स्कीम के खराब प्रदर्शन की वजह

मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि म्यूचुअल फंड स्कीम के खराब प्रदर्शन की कुछ वजहें हो सकती हैं। इनमें सेक्टोरल और स्कीम की इनवेस्टमेंट लिमिट से जुड़े मसले शामिल हैं। इसके अलावा स्कीम के एक्सपेंसेज, लिक्विडिटी और पोर्टफोलियो की रिबैलेंसिंग की कॉस्ट शामिल हैं। सेबी के कंसल्टेशन पेपर में कहा गया है कि बेंचमार्क के मुकाबले किसी फंड का खराब प्रदर्श यूनिटहोल्डर्स के हित में नहीं है।

एएमसी को इंफॉर्मेशन डॉक्युमेंट में बताना होगा

सेबी ने कहा है कि एक एएमसी तभी ज्यादा फीस चार्ज कर सकती है, जब उसकी ओपन-एंडेड एक्टिव स्कीम इंडिकेटिव रिटर्न के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा अगर कोई स्कीम प्री-डिसाइडेड हर्डल रेट से बेहतर प्रदर्शन करती है तो तो भी एएमसी ज्यादा फीस चार्ज कर सकती है। एएमसी को हर्डल रेट के बारे में इंफॉर्मेशन डॉक्युमेंट में स्पष्ट तौर पर बताना होगा।

इनवेस्टर्स में जागरूकता का अभाव

एक रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर ने कहा कि म्यूचुअल फंड की स्कीम का प्रदर्शन कई बातें पर निर्भर करता है। कई इनवेस्टर्स तो कई साल तक निवेश करने के  बाद भी ग्रोथ और डिविडेंड के बीच फर्क नहीं समझ पाते। कई लोगों को यह पता नहीं होता कि उन्हें जो डिविडेंड अमाउंट मिलता है, उसका कैलकुलेशन किस तरह से होता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।