इनकम टैक्स का सेक्शन 80G टैक्स बचाने में करता है मदद, जानिए कैसे

अगर आप सेक्शन 80जी का फायदा उठाना चाहते हैं तो चैरिटी करने से पहले आपको उस संस्थान की कैटेगरी चेक करनी होगी, जिसे आप चैरिटी करना चाहते हैं। इससे आपको यह पता चलेगा कि आप डोनेशन पर कितना डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं

अपडेटेड Apr 18, 2023 पर 4:56 PM
सेक्शन 80जी के तहत रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट मान्यताप्राप्त संस्थाओं को पैसा दान कर उस पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) में ऐसे कई प्रावधान हैं, जो टैक्स बचाने में टैक्सपेयर्स की मदद करते हैं। इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा होती है। इसके तहत करीब एक दर्जन ऐसे इंस्ट्रूमेंट और खर्च शामिल हैं, जो टैक्स लायबिलिटी कम करने में मदद करते हैं। इनमें PPF, Tax Fund, बच्चों की ट्यूशन फीस, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी आदि आते हैं। इनकम टैक्स का सेक्शन 80डी हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत देता है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का सेक्शन 80जी (Section 80G) भी टैक्स लायबिलिटी कम करने में मदद करता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है सेक्शन 80जी?

सेक्शन 80जी टैक्सपेयर्स को डोनेशन के जरिए टैक्स सेविंग्स में मदद करता है। टैक्सपेयर्स शर्तें पूरी करने वाली संस्थाओं को चैरिटी करने के बाद उसके अमाउंट पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। टैक्सपेयर्स को डोनेशन के अमाउंट पर 50 से 100 फीसदी तक डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत है। इस सेक्शन का लाभ उठाने के लिए कुछ नियम और शर्तें तय हैं।


क्या है शर्त?

सेक्शन 80जी के तहत रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट मान्यताप्राप्त संस्थाओं को पैसा दान कर उस पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि इस सेक्शन का लाभ सिर्फ ऐसे टैक्सपेयर्स उठा सकते हैं, जो इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को इस प्रावधान का फायदा उठाने की इजाजत नहीं है।

कैसे उठा सकते हैं फायदा?

अगर आप सेक्शन 80जी का फायदा उठाना चाहते हैं तो चैरिटी करने से पहले आपको उस संस्थान की कैटेगरी चेक करनी होगी, जिसे आप चैरिटी करना चाहते हैं। इससे आपको यह पता चलेगा कि आपको डोनेशन पर 50 फीसदी डिडक्शन क्लेम करना होगा या 100 फीसदी। कुछ संस्थानों को दिए गए दान पर बगैर किसी लिमिट 100 फीसदी या 50 फीसदी डिडक्शन की इजाजत है।

इसे हम एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आपकी टोटल ग्रॉस इनकम सालाना 10 लाख रुपये है। आपने एक स्वयंसेवी संगठन को 90,000 रुपये का डोनेशन किया है। यह एनजीओ 10 फीसदी क्वालिफाइंग लिमिट के साथ 50 फीसदी डिडक्शन की कैटेगरी में आता है। आपने सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये का डिडक्शन क्लेम किया है और शेयरों की बिक्री से 1 लाख रुपये का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस कमाया है। आप 80जी के तहत मैक्सिमम कितना डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं, इसका कैलकुलेशन करना होगा।

इसके लिए आपकी टोटल ग्रॉस इनकम में से सेक्शन 80सी के तहत क्लेम किया गया डिडक्शन और सेक्शन 111ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस को घटाना होगा। उपर्युक्त उदाहरण में 10 लाख में से पहले 1.5 लाख रुपये और फिर 1 लाख रुपये घटाना होगा। ऐसा करने के बाद 7.5 लाख रुपये का अमाउंट आता है। इसके बाद आपको सेक्शन 80जी के तहत डोनेशन के लिए क्वालिफाइंग लिमिट का कैलकुलेशन करना होगा। यह एडजस्टेड ग्रॉस टोटल इनकम का 10 फीसदी होगा। इस तरह उपर्युक्त उदाहरण में क्वालिफाइंग लिमिट 75,000 रुपये आता है।

सेक्शन 80जी के तहत मैक्सिमम अलाउड अमाउंट डोनेट किए गए लोअर अमाउंट को 50 फीसदी होगा। उपर्युक्त उदाहरण में क्वालिफाइंग अमाउंट 75,000 रुपये है। इस तरह सेक्शन 80जी के तहत मैक्सिम डिडक्शन की इजाजत 75,000 रुपये का 50 फीसदी को होगी। जो इस मामले में 37,500 रुपये आता है। इस तरह आप एनजीओ को किए गए डोनेशन पर 37,500 का डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

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