लोकसभा चुनावों के नतीजों का सेक्टोरल और थिमैटिक फंडों पर असर पड़ सकता है। इसकी वजह है कि राजनीतिक दलों की इकोनॉमी की ग्रोथ को लेकर अलग-अलग स्ट्रेटेजी होती है। इसलिए नई सरकार का असर कुछ खास सेक्टर या थीम पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। नई सरकार का फोकस निवेश आधारित इकोनॉमिक ग्रोथ पर रहने की उम्मीद है। हालांकि, सरकार की मौजूदा पॉलिसी में थोड़ा बदलाव हो सकता है।
मार्केट सेटिंमेंट का फंड्स पर असर
सेक्टोरल (Sectoral Fund) और थिमैटिक फंड्स (Thematic Funds) रिटेल इनवेस्टर्स के लिए नहीं होते हैं। फिर भी, इनमें निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों को इस बात का आकलन करने की जरूरत है कि चुनावी नतीजों का असर उन सेक्टर या थिमैटिक फंडों पर क्या असर पड़ेगा, जिनमें उन्होंने निवेश किया है। 4 जून को Sensex और Nifty में करीब 6 फीसदी की गिरावट आई। इसकी वजह यह थी कि BJP को अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिली थी। हालांकि, अगले दो दिनों में मार्केट में रिकवरी दिखी।
यह गिरावट बुल मार्केट का अंत नहीं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडियन स्टॉक्स की वैल्यूएशन पहले से ही काफी ज्यादा थी। ऐसे में चुनावी नतीजों के दिन मार्केट को गिरने का सही बहाना मिल गया। यस सिक्योरिटीज के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अमर अंबानी ने कहा कि यह गिरावट बुल मार्केट का अंत नहीं है। इंडियन बैंकिंग, कॉर्पोरेट सेक्टर और हाउसिंग मार्केट में किसी तरह का बुलबुला नहीं दिख रहा है।
वैल्यूएशन पर करीबी नजरें होंगी
चुनावी नतीजों के बाद आई गिरावट से मार्केट की वैल्यएशन में कमी आई है। लार्जकैप स्टॉक्स और बैंकिंग और कंज्यूमर जैसे खराब प्रदर्शन वाले स्टॉक्स का रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो फेवरेबल दिख रहा है। दूसरी तरफ कैपिटल गुड्स, पावर, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग जैसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर की वैल्यूएशन पर करीबी नजरें होंगी। टाटा एसेट मैनेजमेंट के सीआईओ राहुल सिंह ने कहा कि मैक्रो पैरामीटर्स में बदलाव नहीं दिख रहा है। ऐसे में मार्केट की नजरें नई सरकारी की पॉलिसी पर होंगी। इसके संकेत बजट से मिलेंगे।
कुछ सेक्टोरल फंडों का अट्रैक्शन घटने के आसार
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीएसयू फोकस्ड फंड्स अभी अट्रैक्टिव नहीं लग रहे हैं। इसकी वजह है कि यह तय नहीं है कि गठबंधन सरकार पहले से तय रोडमैप पर चलेगी या नया रास्ता तैयार करेगी। दूसरा, गठबंधन सरकार का झुकाव लोकलुभावन उपायों पर हो सकता है। इसका असर उन सेक्टर पर पड़ सकता है, जिन पर अब तक सरकार जोर देती आई है। सेक्टोरल और थिमैटिक फंड का प्रदर्शन अच्छा रहने पर उनमें निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ जाती है।
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दोनों ही फंड में निवेश में रिस्क
निवेशकों को यह समझने की जरूरत है कि सेक्टोरल और थिमैटिक दोनों ही फंड में काफी रिस्क है। इसलिए निवेश करने से पहले निवेशकों को फंड से जुड़े सेक्टर के बारे में ठीक तरह से समझ लेना चाहिए। अगर किसी खास सेक्टर पर आपको आउटलुक बहुत अच्छा दिख रहा है तभी आपको उसमें निवेश करने का फैसला लेना चाहिए।