इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन नजदीक आ रही है। डेडलाइन से पहले इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना फायदेमंद है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम समय में रिटर्न फाइल करने में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है। इनकम टैक्स कानून के मुताबिक, हर व्यक्ति जिसकी इनकम बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से ज्यादा है, उसके लिए रिटर्न फाइल करना जरूरी है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई है।
किसे रिटर्न फाइल करना जरूरी है?
अगर आपकी इनकम बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से ज्यादा है तो आपको 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करना होगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) की तरफ से रिटर्न फाइलिंग के लिए फॉर्म (ITR Forms) इश्यू कर दिए गए हैं। नौकरी करने वाले टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए फॉर्म 16 (Form 16) जरूरी है। एंप्लॉयर के लिए 15 जून तक फॉर्म 16 जारी करना जरूरी है। अगर आप सैलरीड टैक्सपेयर हैं तो आपको यह चेक कर लेना चाहिए कि आपकी कंपनी ने फॉर्म 16 जारी किया है या नहीं।
रिटर्न नहीं फाइल करने पर क्या होगा?
अगर आप अंतिम तारीख तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो आपको पेनाल्टी चुकानी होगी। हालांकि, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बिलेटेड रिटर्न यानी डेडलाइन के बाद रिटर्न फाइल करने की सुविधा देता है। लेकिन, बिलेटेड रिटर्न आप तभी फाइल कर सकेंगे जब आप पेनाल्टी चुकाएंगे। यह पेनाल्टी इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 234एफ के तहत लगाई जाती है। अगर किसी टैक्सपेयर की कुल इनकम एक फाइनेंशियल ईयर में 5 लाख रुपये तक है तो उस पर 1,000 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर 5000 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। साथ ही टैक्सपेयर्स को टैक्स अमाउंट पर हर महीने 1 फीसदी का इंटरेस्ट चुकाना होगा। बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर तक फाइल किया जा सकता है।
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रिटर्न नहीं फाइल करने के क्या-क्या है नुकसान?
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करने के कई नुकसान हैं। टैक्सपेयर करेंस एसेसमेंट ईयर के लॉस को कैरी-फॉरवर्ड नहीं कर सकेगा। अगर टीडीएस के रूप में उसका टैक्स ज्यादा कटा है तो उसे तबक तक रिफंड नहीं मिलेगा, जब तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं कर दिया जाता। अगर टैक्सपेयर होम लोन या कार लोन लेना चाहता है तो बगैर इनकम टैक्स रिटर्न उसका लोन अप्लिकेशन बैंक एक्सेप्ट नहीं करेगा।