वेतनभोगी एंप्लॉयीज के लिए कई डॉक्युमेंट्स उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में मदद मिल सकती है। इनमें से एक दस्तावेज है फॉर्म-16, जिसमें किसी शख्स की सैलरी, भत्ते, कटौतियों आदि का जिक्र होता है। नियम के मुताबिक, एंप्लॉयर्स यानी कंपनियां हर साल 15 जून या इससे पहले फॉर्म 16 जारी करती हैं, जिसमें टैक्स कटौतियों का ब्यौरा होता है।
फॉर्म 16 में क्या-क्या होता है
इस सेक्शन में एंप्लॉयर और एंप्लॉयी के बारे में ब्यौरा होता है। इसके तहत दोनों का पैन नंबर, एंप्लॉयर का टैन (टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन एकाउंट नंबर) और रोजगार से जुड़ी अवधि शामिल होती है। इसके अलावा, इसमें टैक्स कटौतियों के बारे में भी जानकारी होती है।
फॉर्म-16 का पार्ट B टैक्सपेयर्स के लिहाज से सबसे अहम होता है। इसमें एंप्लॉयीज की सैलरी, भत्ते और अन्य इनकम के बारे में सिलसिलेवार जानकारी होती है। इसमें इनकम टैक्स के अलग-अलग सेक्शन के तहत मांगी गई छूट का ब्यौरा होता है, मसलन सेक्शन 80सी (निवेश), सेक्शन 80डी (मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम) आदि का जिक्र होता है।
फॉर्म-16 का कैसे जायजा लें
आपको फॉर्म-16 के पार्ट B में मौजूद सैलरी डिटेल्स पर ध्यान देना चाहिए। इसमें बेसिक सैलरी, भत्ते, बोनस आदि का भी शामिल होते हैं।
Form-16 में इनकम टैक्स एक्ट के अलग-अलग सेक्शन के तहत मांगी गई टैक्स छूट की भी विस्तार से जानकारी होती है। टैक्सपेयर्स को इन छूट और कटौतियों की भी जांच करनी चाहिए।
फॉर्म-16 के पार्ट B में एंप्लॉयी की कुल इनकम और इस पर बकाया कुल टैक्स का विवरण होता है। इसमें एंप्लॉयर द्वारा काटे गए टीडीएस का भी जिक्र होता है। इसके अलावा, अन्य टैक्स लाइबिलिटी या रिफंड आदि की भी जानकारी होती है।
इनकम टैक्स रिटर्न के लिए फॉर्म 16 का इस्तेमाल करना
फॉर्म-16 एंप्लॉयीज के लिए इनकम टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान बनाता है। इसके जरिये टैक्सपेयर्स को एक जगह पर कमाई, टैक्स कटौतियों आदि का ब्यौरा मिल जाता है। इसके साथ ही टैक्सपेयर्स सही तरीके से अपनी इनकम बता सकते हैं और रिटर्न भरते समय छूट का दावा कर सकते हैं।