Mutual Funds: म्यूचुअल फंड्स में लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। ज्यादातर लोग पहले एक सिप इक्विटी फंड में शुरू करते हैं। फिर, टैक्स-सेविंग्स के लिए ईएलएसएस में सिप शुरू करते हैं। बाद में उन्हें लगता है कि स्मॉलकैप फंड में निवेश करने से ज्यादा रिटर्न मिलेगा। फिर वे नया सिप ओपन करते हैं। इस तरह से उनके कई सिप हो जाते हैं। सवाल है कि आपके इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में कुल कितने सिप होने चाहिए?
नया सिप सोचसमझ कर शुरू करें
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई इनवेस्टर्स नया सिप शुरू करने से पहले ज्यादा नहीं सोचते हैं। इससे उनके पोर्टफोलियो में 8, 10 यहां तक कि 11-12 तक सिप हो जाते हैं। उनके पोर्टफोलियो में शामिल कई फंड एक-दूसरे से मिलते हैं। इसका मतलब है कि कई सिप से निवेश करने के बावजूद उनका पोर्टफोलियो पर्याप्त रूप से डायवर्सिफाड नहीं होता है।
डायवर्सिफिकेशन का ध्यान जरूर रखें
म्यूचुअल फंड में निवेश करने में डायवर्सिफिकेशन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। डायवर्सिफिकेशन के लिए ज्यादा फंड में निवेश करना जरूरी नहीं है बल्कि हर निवेश सोचसमझकर करने की जरूरत है। यह सोच गलत है कि कई तरह के फंड में निवेश करने से रिटर्न बढ़ जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटर्न ज्यादा फंड में निवेश करने से नहीं बढ़ता है कि बल्कि फंडों का सही तरह से चुनाव करने से बढ़ता है।
पोर्टफोलियो में ज्यादा फंड मुश्किल बढ़ाते हैं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी इनवेस्टर के पोर्टफोलियो में कितने फंड होने चाहिए, यह तय करने के लिए कोई फॉर्मूला नहीं है। लेकिन, यह तय है कि ज्यादा फंड होने से मुश्किल होती है। ज्यादातर फाइनेंशियल प्लैनर्स का मानना है कि अगर कोई निवेशक हर महीने सिप से 25,000 रुपये का निवेश करता है तो उसके पोर्टफोलियो में 3-5 फंड हो सकते हैं। इनका चुनाव सोचसमझकर किया जाना चाहिए। तभी पोर्टफोलियो डायवर्सिफायड होगा।
ऐसा हो सकता है एक बैलेंस्ड पोर्टफोलियो
एक निवेशक अपने पोर्टफोलियो में एक डायवर्सिफायड फ्लेक्सी-कैप या लार्जकैप और मिडकैप फंड शामिल कर सकता है। इससे पोर्टफोलियो को स्टैबिलिटी मिलेगी। दूसरा फंड मिडकैप या स्मॉलकैप हो सकता है। इससे पोर्टफोलियो को ग्रोथ मिलेगी। तीसरा फंड इंटनरनेशनल या इंडेक्स फंड हो सकता है। यह इनवेस्टर की रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करेगा कि वह इंटनरेशन फंड में निवेश करेगा या इंडेक्स फंड में पैसे लगाएगा। इन तीनों फंडों के मेल से उसका पोर्टफोलियो डायवर्सिफायड बनेगा।
एक बार पोर्टफोलियो को रिव्यू जरूर करें
फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि अगर आपने अब तक फंड का चुनाव ज्यादा सोचसमझकर नहीं किया है तो आपको अपने पोर्टफोलियो को रिव्यू करना चाहिए। अगर आपको लगता है कि आपके पोर्टफोलियो में एक जैसे कई फंड शामिल हैं तो आप उनमें से कमजोर प्रदर्शन करने वाले फंड को बाहर कर सकते हैं। आप अच्छे प्रदर्शन वाले सिर्फ 4-5 फंड को पोर्टफोलियो में रख सकते हैं, जो एक दूसरे से अलग हों। इससे आपका पोर्टफोलियो बैलेंस होगा और आपका रिटर्न भी बढ़ जाएगा।