शेयर बाजार जहां एक तरफ नया हाई बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ SIP में भी निवेश लगातार बढ़ रहा है। लेकिन SIP में बढ़ता निवेश लग्जरी कार कंपनियों के लिए चिंता का सबब बन गया है। मर्सिडीज़ बेंज़ इंडिया के सेल्स एंड मार्केटिंग हेड संतोष अय्यर का मानना है कि SIP में बढ़ते निवेश की वजह से भारत में लग्जरी कार इंडस्ट्री की ग्रोथ में बाधा आ रही है। अय्यर के मुताबिक SIP उनका कॉम्पिटीटर है। वो अपनी टीम को कहते हैं कि अगर SIP में निवेश के साइकल को तोड़ दिया जाए, तो लग्जरी कार इंडस्ट्री में तेज ग्रोथ देखने को मिल सकती है। अय्यर के मुताबिक भारत में लोग बचत पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
लग्जरी कार कंपनियों के सामने नई चुनौतियां हैं। अय्यर का कहना है कि नई जेनरेशन का SIP पर ज्यादा फोकस है। नई पीढ़ी बचत और निवेश पर जोर दे रही है। जनवरी के बाद से 15 हजार गाड़ियों की इंक्वायरी हुई। इंक्वायरी के मुकाबले सिर्फ 10 फीसदी गाड़ियों का ऑर्डर मिला है। वहीं, अक्टूबर में रिकॉर्ड SIP इनफ्लो देखने को मिला है। अक्टूबर में SIP इनफ्लो इसी साल के सितंबर के 12000 करोड़ रुपए से बढ़कर 13000 करोड़ रुपए पर आ गया है।
एसआईपी में बढ़ते निवेश पर नजर डालें FY21 में एसआईपी में 96080 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। FY22 में एसआईपी के जरिए 124,566 करोड़ का निवेश हुआ था। FY23 में अक्टूबर तक एसआईपी के जरिए 87275 करोड़ का निवेश हुआ है। FY23 में हर महीने एसआईपी के जरिए 11000 करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ है।
गुड EMI की मात्रा बैड EMI से ज्यादा होनी चाहिए
मर्सिडीज बेंज संतोष अय्यर के बयान से ये सवाल पैदा हो गया है कि हमें बचत पर फोकस करना चाहिए या अपने शौक भी पूरे करने चहिए? इस पर अपनी राय रखते हुए कम्प्लीट सर्किल के मैनेजिंग पार्टनर गुरमीत चड्ढा ने कहा कि जिदंगी में बैलेंसे करना ज्यादा जरूरी है। मैं कहता हूं कि गुड EMI और बैड EMI दो चीजें हैं। गुड EMI की मात्रा बैड EMI से ज्यादा होनी चाहिए। अगर आप 50000 की SIP करते हैं और उसमें आपको निफ्टी जितना 14-14 फीसदी का रिटर्न मिलता है तो आप तो आप एक सिस्टेमेटिक बिद्ड्रॉल सिस्टम से मर्सडीज की किस्त को फंड कर सकते हैं।
जीवन को एंजॉय करना भी जरूरी
गुरमीत चड्ढा ने आगे कहा कि जीवन को एंजॉय करना भी उतना ही जरूरी है जितना बचत करना। 20-25 साल अगर आप अपनी सारी इच्छाएं खत्म कर देते हैं और आपका पोर्टफोलियो बहुत बड़ा हो भी जाता है तो भी उसका बहुत ज्यादा मतलब नहीं है। क्योंकि जीवन को अच्छे से जीने की आपकी प्राइम एज तो निकल जाती है। ऐसे में खर्च और बचत में एक संतुलन होना चाहिए।
बचत और खपत में अच्छा संतुलन जरूरी
उन्होनें आगे कहा कि किसी इकोनॉमी को खपत ही ड्राइव करती है। दूसरी तरफ इनवेस्टर भी इकोनॉमी के लिए काफी अहम होता है। ऐसे में बचत और खपत में अच्छा संतुलन ही इकोनॉमी को अच्छी तरह से ड्राइव कर सकता है। अगर आपकी बचत खर्च से ज्यादा है तो मर्सडीज क्या आपको जो भी अच्छा लगे वो लेना चाहिए।
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