Silver outlook: धनतेरस 2027 तक चांदी में 40% का उछाल मुमकिन, लेकिन नियर टर्म में एनालिस्ट दे रहे है सतर्क रहने की सलाह, जानें क्यों
Silver Price Today: कमोडिटी एनालिस्टों का अनुमान है कि एक साल में चांदी की कीमत 2,65,000 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी धनतेरस 2027 तक चांदी की कीमतों में 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव है जबकि इसी अवधि में सोने की कीमतों में 20-30 फीसदी का उछाल आ सकता है।
निरपेंद्र यादव का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में चांदी में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
Silver Price Today: धनतेरस को पारंपरिक रूप से धन-संपदा के स्वागत के अवसर के तौर पर देखा जाता है, और कई निवेशक इस शुभ दिन का उपयोग अपने पोर्टफोलियो में सोना और चांदी शामिल करने के लिए करते हैं। कमोडिटी एनालिस्टों का अनुमान है कि एक साल में चांदी की कीमत 2,65,000 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी धनतेरस 2027 तक चांदी की कीमतों में 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव है जबकि इसी अवधि में सोने की कीमतों में 20-30 फीसदी का उछाल आ सकता है।
ऑगमॉन्ट की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनीशा चैनानी के अनुसार, चांदी - जो अभी 1.88 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (लगभग 52 डॉलर प्रति औंस) पर है , उसमें 40 फीसदी की तेजी आ सकती है और यह लगभग 2.65 लाख रुपये (लगभग 75 डॉलर) तक पहुंच सकती है। वहीं, सोना - जो अभी 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम (लगभग 4,100 डॉलर प्रति औंस) पर है , उसमें 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है और दिवाली 2027 तक यह लगभग 1.75 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 4,950 डॉलर प्रति औंस के बराबर होगा।
3-12 महीनों के लिए चांदी का आउटलुक
बोनान्ज़ा पोर्टफोलियो के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में चांदी में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। हालांकि नियर टर्म में सतर्क रहना जरुरी है। लेकिन अगर मौद्रिक और निवेश की स्थितियां अधिक अनुकूल होती हैं, तो इसमें धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि "चांदी अभी भी एक मजबूत और टिकाऊ तेजी (अपट्रेंड) बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। तकनीकी रूप से, अगले 6-12 महीनों में चांदी में सुधार आ सकता है, बशर्ते सोने में फिर से तेजी आए और कीमती धातुओं में निवेश का प्रवाह वापस लौटे।"
उनका अनुमान है कि अगर चांदी की कीमतें $62 के स्तर को तोड़कर उसके ऊपर बनी रहती हैं, तो ये $70 की ओर बढ़ सकती हैं। यह स्तर एक अहम रेजिस्टेंस (रुकावट) का काम करेगा, और इसके ऊपर जाने पर ही और तेजी की संभावना बनेगी। वहीं, अगर कीमतें $47 के स्तर से नीचे गिरती हैं, तो चांदी पर दबाव बना रह सकता है।
MCX पर, 1,60,000 रुपये का स्तर एक अहम सपोर्ट का काम करेगा, जबकि 215,000 रुपये का स्तर एक रुकावट (हर्डल) साबित हो सकता है। यादव ने कहा, "हालांकि, शॉर्ट से मिड-टर्म का ट्रेंड नीचे की ओर है, इसलिए आने वाले महीनों में चांदी की कीमतेंया तो स्थिर (साइडवेज) रह सकती हैं, या नीचे जा सकती हैं, या फिर एक तय दायरे में कारोबार कर सकती हैं।"
कमोडिटी एनालिस्टों का मानना है कि नियर टर्म में सबसे बड़ा जोखिम ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़ा है। अमेरिका में रियल यील्ड बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से बिना रिटर्न देने वाली कीमती धातुओं का आकर्षण कम हो जाता है।
चांदी विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि सोने की तुलना में इसका 'बीटा' अधिक होता है, जिससे इसमें ऊपर और नीचे की ओर होने वाले उतार-चढ़ाव कहीं अधिक बड़े हो सकते हैं। अगर मौद्रिक सख्ती (monetary tightening) जारी रहने की उम्मीद बनी रहती है, तो नियर टर्म में चांदी का प्रदर्शन सोने के मुकाबले कमजोर रह सकता है। इसके विपरीत, अगर ब्याज दरों में कमी आती है, बॉन्ड यील्ड नरम होती है या अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ता है, तो इसमें एक अच्छी रिकवरी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों को US रियल यील्ड, फेडरल रिजर्व की नीति, US डॉलर, सोने की कीमतों और सोने-चांदी के अनुपात पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये चांदी में निवेश की मांग को तय करने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे।
इसके साथ ही, चीन और भारत में चांदी की फिजिकल मांग, सोलर पैनल में चांदी की खपत, ETF या ETP में निवेश का प्रवाह, एक्सचेंज इन्वेंट्री, रीसाइक्लिंग और खदानों से होने वाली आपूर्ति जैसे कारक फिजिकल मार्केट की स्थिति के बारे में संकेत देंगे।
अगर लगातार निवेश आता रहता है, तो बाजार में फिर से तंगी (सप्लाई की कमी) आ सकती है। वहीं, अगर इन्वेंट्री बढ़ती है और ETF से लगातार पैसा बाहर निकलता है, तो यह संकेत होगा कि पहले जो सप्लाई की कमी थी, वह अब कम हो रही है।
VSRK कैपिटल के डायरेक्टर स्वप्निल अग्रवाल के अनुसार, 2026 के अंत तक चांदी को लेकर नजरिया 'सावधानीपूर्ण' (cautious) है, और इसमें रिकवरी केवल लंबी अवधि में ही संभव है।
स्वप्निल ने कहा, "अगर चांदी की कीमतें गिरकर लगभग 1,75,000 रुपये के स्तर पर आ जाती हैं, तो निवेशक थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि चांदी में लंबी अवधि में रिकवरी संभव है, लेकिन मुझे निकट भविष्य (शॉर्ट टर्म) में किसी बड़ी रिकवरी की उम्मीद नहीं है। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और कोई भी नया फैसला लेने से पहले ब्याज दरों के रुझान पर नजर रखनी चाहिए।"
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