Silver Rate Today: चांदी ने बनाया रिकॉर्ड, पहली बार कीमत 1.10 लाख के पार

Silver Price Today: कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर सिल्वर फ्यूचर्स 1.10 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार हो गया। स्पॉट मार्केट में भी कीमतें 1,09,900 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी में निवेशकों की दिचलचस्पी बढ़ने से कीमतें चढ़ रही हैं

अपडेटेड Jul 11, 2025 पर 2:03 PM
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इंटरनेशनल मार्केट में चांदी 0.4 फीसदी चढ़कर 37.17 डॉलर प्रति औंस थी।

चांदी ने 11 जुलाई को इतिहास रच दिया। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर सिल्वर फ्यूचर्स 1.10 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार हो गया। स्पॉट मार्केट में भी कीमतें 1,09,900 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी में निवेशकों की दिचलचस्पी बढ़ने से कीमतें चढ़ रही हैं। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में चांदी 0.4 फीसदी चढ़कर 37.17 डॉलर प्रति औंस थी।

ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता बढ़ने से चांदी को सपोर्ट

मेहता इक्विटीज के वीपी (कमोडिटीज) राहुल कलांतरी ने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से इनवेस्टर्स की दिलचस्पी निवेश के सुरक्षित विकल्पों में बढ़ी है।" इंडिया में Silver की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही इसकी कीमतों पर निर्भर करती हैं। इस पर डॉलर और रुपये के एक्सचेंज रेट्स का भी असर पड़ता है। डॉलर के मजबूत होने पर रुपये में चांदी खरीदना महंगा हो जाता है।


1,10,700 रुपये पर चांदी के लिए रेसिस्टेंस

इंडियन बुलिय एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट अक्ष कंबोज ने कहा, "ट्रेड टेंशन और टैरिफ के डर की वजह से रिस्की माने जाने वाले एसेट्स में निवेश पर असर पड़ा है। ऐसे में कई इनवेस्टर्स बुलियन यानी सोने और चांदी में निवेश करना पसंद कर रहे है।" सिल्वर के लिए एमसीएक्स पर 1.08 लाख रुपये सपोर्ट का लेवल है। इसे 1,10,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा।

इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में बुलियन शामिल करने में समझदारी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम तौर पर दुनिया में उथल-पुथल और अनिश्चितता बढ़ने पर बुलियन की मांग बढ़ जाती है। मौजूदा माहौल में चांदी में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टर्स को अपने पोर्टफोलियो में बुलियन को जरूर शामिल करना चाहिए। इससे पोर्टफोलियो को डायवर्सिफिकेशन मिलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पोर्टफोलियो में बुलियन की हिस्सेदारी 10-15 फीसदी तक हो सकती है। इससे इक्विटी में अचानक तेज गिरावट पर पोर्टफोलियो को नुकसान से बचाने में मदद मिलती है।

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सिल्वर ईटीएफ के रास्ते कर सकते हैं इनवेस्ट

सोने और चांदी के बीच एक बड़ा फर्क यह है कि चांदी का इस्तेमाल कई तरह की चीजों के उत्पादन में होता है। इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड है। इसकी कीमतों पर इंडस्ट्रियल मांग का असर पड़ता है। सप्लाई डिमांड से कम होने पर कीमतें चढ़ जाती हैं। आगे चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत रहने की उम्मीद है। चांदी में सिल्वर ईटीएफ के जरिए भी निवेश किया जा सकता है। कई सिल्वर ईटीएफ मार्केट में उपलब्ध हैं।

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