SIP Investment: सिप से निवेश के फायदों के बारे में अब ज्यादातर लोग जान चुके हैं। सिप से निवेश की जल्द शुरुआत करें, निवेश में अनुशासन बरतें, लंबी अवधि तक निवेश करें तो फिर आपके लिए बड़ा फंड तैयार हो जाएगा। इसमें सबसे बड़ा रोल कंपाउंडिंग का होता है। लेकिन, कई इनवेस्टर्स का कहना है कि निवेश के दौरान कई बार आपका पैसा ज्यादा तेजी से बढ़ता है तो कई बार उसकी ग्रोथ सुस्त होती है। सवाल है कि सिप से निवेश में आपका पैसा कब तेजी से बढ़ना शुरू होता है?
इस सवाल के जवाब के लिए आप निफ्टी 50 SIP के प्रदर्शन का विश्लेषण कर सकते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अलग-अलग पीरियड में रिटर्न कैसा रहा। यह भी कि समय के साथ इनवेस्टर का एक्सपीरियंस बदलता रहता है। इससे न सिर्फ एवरेज रिटर्न के बारे में पता चलता है बल्कि यह समझने में भी मदद मिलती है को छोटी अवधि और लंबी अवधि में प्रदर्शन किस तरह से रहता है।
शॉर्ट टर्म के नतीजे अनअट्रैक्टिव लग सकते हैं
अगर आप मार्केट की चाल को समझते हैं तो इससे आपको हैरानी नहीं होगी। शेयरों का रिटर्न साइकिल में चलता है। शॉर्ट पीरियड में कई बार मार्केट बड़ी गिरावट से उबर नहीं पाता है। इसका मतलब है कि अगर सिप मार्केट में गिरावट वाले पीरियड में शुरू होता है तो शुरुआती रिटर्न आपको निराश कर सकते हैं। इसका मतलब है कि शॉर्ट पीरियड में टाइमिंग रिस्क ज्यादा होता है।
पीरियड लंबा होने पर तस्वीर बदल जाती है
इनवेस्टमेंट पीरियड बढ़ने पर तस्वीर बदलनी शुरू हो जाती है। SIP के निवेश का पीरियड 5-7 साल होने पर शॉर्ट पीरियड में रिटर्न में गिरावट नहीं दिखती है। 5 साल के कई टाइमफ्रेम में मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद सिप का रिटर्न 5 से 10 फीसदी के बीच रहा है। 7 साल के निवेश पीरियड में ज्यादातर बार रिटर्न पॉजिटिव हो जाता है।
इसका मतलब है कि इनवेस्टमेंट पीरियड लंबा होने पर मार्केट में तेजी आने पर करेक्शन का असर खत्म होने लगता है। इसके बाद कंपाउंडिंग का असर साफ दिखने लगता है। शुरुआती सालों का रिटर्न फ्यूचर ग्रोथ में मदद करता है। इसके बाद सिप के निवेश पर मार्केट के उतारचढ़ाव का ज्यादा असर दिखना बंद हो जाता है।
लंबी अवधि के लिए निवेश जारी रखने पर
निवेश का पीरियड बढ़ाकर 7 साल करने पर निगेटिव रिटर्न दिखना पूरी तरह बंद हो जाता है। सालाना डबल डिजिट रिटर्न सामान्य बात हो जाती है। फिर मार्केट में उतार-चढ़ाव का असर शॉर्ट पीरियड के मुकाबले काफी कम दिखता है।
यहां सबसे बड़ा बदलाव मार्केट के उतार-चढ़ाव में नहीं बल्कि इनवेस्टर के एक्सपीरियंस में आता है। निवेश का पीरियड लंबा होने पर मार्केट में गिरावट से उबरने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। साथ ही इनवेस्टमेंट का पार्टिसिपेशन मार्केट रिकवरी में होता है, जिससे रिटर्न बढ़ जाता है।
इनवेस्टर्स के लिए सबसे जरूरी बात
कई SIP बहुत जल्द बंद कर दिए जाते हैं। इसकी वजह यह नहीं है कि स्ट्रेटेजी बदल जाती है बल्कि रिटर्न इनवेस्टर की उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता है। अगर आप 2-3 साल के लिए सिप से निवेश करते हैं तो मार्केट में उतार-चढ़ाव का खराब असर रिटर्न पर पड़ता है। लेकिन, लंबी अवधि तक सिप से निवेश कर मार्केट में उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर रिटर्न पर नहीं दिखता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट टर्म में होने वाले उतार-चढ़ाव निवेशकों का धैर्य तोड़ देते हैं, लेकिन लंबी अवधि का निवेश निवेश को मनमाफिक रिटर्न देता है।