आप रिटायरमेंट बाद (Post retirement) किस तरह की जिंदगी चाहते हैं? क्या आप पसंदीदा जगह घूमना चाहते हैं, अपनी हॉबी पूरे करना चाहते हैं और उन लोगों के साथ वक्त बिताना चाहते हैं, जो अब तक आपसे दूर रहते आए हैं? इन सबके बीच रिटायरमेंट बाद आपको अपने हेल्थकेयर (Healthcare) को भी प्रायरिटी में रखना पड़ेगा। खासकर तब जब डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों ने घर-घर में जगह बना ली है। ऐसे में आपको रिटायरमेंट बाद खुद और पत्नी के लिए कम से कम 15-20 लाख रुपये का इंतजाम सिर्फ हेल्थकेयर के लिए रखना होगा।
सही हेल्थ पॉलिसी का चुनाव करें
रिटायर हो चुके लोगों का हेल्थ पर होने वाला खर्च कई चीजों पर निर्भर करता है। इनमें लाइफ स्टाइल (स्मोकिंग/अल्कोहल), फैमिली हिस्ट्री और प्री-एग्जिस्टिंग कंडीशंस शामिल हैं। आपके लिए एक अच्छी हेल्थ पॉलिसी जरूरी होगी। लेकिन, हेल्थकेयर पॉलिसी खरीदने से पहले आपको कई तरह के प्रोडक्ट्स और उनसे जुड़े फायदों को समझ लेना ठीक रहेगा। ऐसी पॉलिसी ठीक रहेगी, जिसमें डॉक्टर की कंसल्टेशन फीस और ओपीडी चार्ज भी कवर होती हो। इसके अलावा आपको नेटवर्क हॉस्पिटल्स की लिस्ट भी देख लेनी चाहिए। यह चेक करना जरूरी है कि आप अक्सर इलाज जिस हॉस्पिटल में कराते हैं, उसका नाम लिस्ट में है या नहीं।
ज्यादा रिटर्न वाले इनवेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स में करें निवेश
रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए आपको अपनी वित्तीय स्थिति को ध्यान रख रणनीति बनानी होगी। सबसे पहले आपको इमर्जेंसी फंड के लिए पैसा अलग करना होगा। इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ इमर्जेंसी की स्थिति में किया जाना चाहिए। उसके बाद आपके लिए एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना जरूरी है। इसके लिए आप कई तरह के इनवेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स में इनवेस्ट कर सकते हैं। इनमें म्यूचु्अल फंड्स, स्टॉक्स, बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं। अगर आपको इन चीजों में दिक्कत आती है तो आप एक फाइनेंशियल कंसल्टेंट की मदद ले सकते हैं। वह आपको बताएगा कि पैसा कहां इनवेस्ट करने में सबसे ज्यादा फायदा है।
टैक्स लायबिलिटी का भी रखें ख्याल
आपको अपनी टैक्स लायबिलिटी का भी ध्यान रखना होगा। ज्यादा से ज्यादा टैक्स बेनेफिट लेना समझदारी होगी। इनकम टैक्स के सेक्शन 80डी के तहत बुजुर्ग लोग मेडिक्लेम पॉलिसी के प्रीमियम पर सालाना 50,000 रुपये का डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। पेंशन इनकम पर आप सालाना 50,000 रुपये का डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसके अलावा आपको उन निवेश माध्यमों को अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग में शामिल करने की जरूरत है, जिसमें मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स के दायरे में नहीं आता है।