टैक्स-सेविंग्स के लिए इनवेस्ट करने जा रहे हैं? जानिए ELSS में निवेश से धैर्य रखने वाले इनवेस्टर्स को किस तरह मिलता है इनाम

ELSS की खासियत यह है कि यह लंबी अवधि में बहुत अच्छा रिटर्न देने के साथ ही आपको टैक्स-सेविंग्स में भी मदद करता है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत ELSS में एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपये तक का निवेश कर टैक्स-डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है

अपडेटेड Mar 13, 2023 पर 6:13 PM
पिछले साल SEBI ने म्यूचुअल फंड हाउसेज को पैसिवली मैनेज्ड ELSS लॉन्च करने की इजाजत दी थी। इसमें शर्त यह है कि सिर्फ वे फंड हाउसेज इसे लॉन्च कर सकेंगे जिनके पास पहले से कोई ELSS नहीं है।

कुछ लोग अंतिम वक्त में टैक्स-सेविंग्स (Tax Savings) करते हैं। ऐसे में ज्यादा विचार किए बगैर किसी ऑप्शन में इनवेस्ट कर देते हैं। बाद में जब उन्हें उसके बारे में डिटेल जानकारी मिलती है तो उन्हें अफसोस होता है। अगर आप टैक्स-सेविंग्स करने के लिए अच्छे ऑप्शन की तलाश में हैं तो आप म्यूचुअल फंड की टैक्स स्कीम के बारे में सोच सकते हैं। इसे इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) भी कहा जाता है। यह उन निवेशकों को बहुत अच्छा रिटर्न देता है, जो थोड़े समय तक अपने पैसे को इस फंड में बनाए रख सकते हैं।

क्या है ELSS?

म्यूचुअल फंड कंपनियां ELSS लॉन्च करती हैं। मार्केट में पहले से करीब सभी बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनियों की ELSS मौजूद हैं। यह स्कीम अपना कम से कम 80 फीसदी पैसा शेयरों में निवेश करती हैं। ELSS में निवेश करने के तीन साल तक आप इसकी यूनिट्स बेच नहीं सकेंगे। इसका मतलब है कि इस स्कीम में लॉक-इन पीरियड तीन साल है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपये तक ELSS में निवेश कर टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें : क्या Silicon Valley Bank अमेरिका में इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने का झटका बर्दाश्त नहीं कर सका?


कितना है रिटर्न?

पिछले तीन साल में (8 मार्च, 2023) म्यूचुअल फंड की टैक्स स्कीमों का औसत रिटर्न 17.77 फीसदी रहा है। पांच साल में यह 10.79 फीसदी रहा है। IDBI म्यूचुअल फंड के चीफ इनवेस्ट अफसर आलोक रंजन ने कहा, "जब बड़े देशों की इकोनॉमिज मंदी की आशंका का सामना कर रही हैं, तब इंडियन इकोनॉमी अच्छी ग्रोथ दिखा रही है। मीडियम टर्म में इंडिया में कंपनियों के मुनाफे में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। ELSS में इनवेस्टमेंट से इनवेस्टर्स इस मौके का फायदा उठा सकते हैं। साथ ही वे टैक्स-सेविंग्स भी कर सकते हैं।"

mutual fund return

किसमें करें इनवेस्ट?

मार्केट में 38 ELSS मौजूद हैं। इसमें अपने लिए सही स्कीम का चुनाव करना आसान नहीं है। दो को छोड़ बाकी ELSS एक्टिवली मैनेज्ड स्कीम हैं। ज्यादातर स्कीमों के पोर्टफोलियो में फ्लेक्सीकैप शेयर शामिल होते हैं। इसका मतलब है कि छोटी-बड़ी हर तरह की कंपनियों के शेयर होते हैं। औसतन ELSS ने अपना 72 फीसदी पैसा लार्ज कैप शेयरों में लगाया है। कुछ एक्टिविली मैनेज्ड स्कीमें हैं जिन्होंने मिडकैप और स्मॉलकैप में भी अच्छा निवेश किया है।

पिछले साल SEBI ने म्यूचुअल फंड हाउसेज को पैसिवली मैनेज्ड ELSS लॉन्च करने की इजाजत दी थी। इसमें शर्त यह है कि सिर्फ वे फंड हाउसेज इसे लॉन्च कर सकेंगे जिनके पास पहले से कोई ELSS नहीं है। अगर कोई ऐसा म्यूचुअल फंड हाउस पैसिवली मैनेज्ड ELSS लॉन्च करना चाहता है जिसकी ELSS पहले से बाजार में है तो उसे पुरानी ELSS में नया इनवेस्टमेंट नहीं लेना होगा।

IIFL ELSS Nifty 50 Tax Saver Index Fund और Navi Elss tax Saver nifty 50 index Fund दो पैसिवली मैनेज्ड टैक्स फंड हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है कि ये NIFTY 50 इंडेक्स को ट्रैक करते हैं।

एक सवाल जो अक्सर इनवेस्टर्स के दिमाग में होता है वह यह है कि उन्हें कितनी ELSS में निवेश करना चाहिए? सेबी रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर और गोलब्रिज की फाउंडर रोशिनी नायक ने कहा कि पोर्टफोलियो में सिर्फ एक ELSS होना काफी है। अगर इनवेस्टर्स एक से ज्यादा ईएलएसएस में निवेश करते हैं तो उनके पोर्टफोलियो में डुप्लिकेशन की संभावना होती है। इसकी वजह यह है कि ज्यादार ELSS के पोर्टफोलियो में समानता होती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।