Silicon Valley Bank का एसेट्स 2022 के आखिर में 209 अरब डॉलर था। यह एसेट बैंक की मजबूती का संकेत देता है। फिर, कुछ ही महीनों में इतने ज्यादा एसेट वाला बैंक दिवालिया होने के कगार पर कैसे पहुंच गया? एनालिस्ट्स इस सवाल का जवाब तलाने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, डिपॉजिटर्स और इनवेस्टर्स को अपने पैसे की चिंता सता रही है। अमेरिका के 16वें सबसे बड़े बैंक के इस मामले में क्या दूसरे बैंकों के लिए भी सबक छिपा हुआ है? क्या बहुत मजबूत बैंक भी कुछ ही महीनों में दिवालिया हो सकता है? ये ऐसे सवाल हैं जो अमेरिका से हजारों किलोमीटर दूर इंडिया में भी डिपॉजिटर्स को परेशान कर रहे हैं। दरअसल, मेहनत की कमाई के इस तरह से डूबने का ख्याल भी रोंगटे खड़े कर देता है।
10 मार्च को आई बैंक के बंद होने की खबर
10 मार्च को अमेरिकी रेगुलेटर्स के सिलिकॉन वैली बैंक को बंद कर देने की खबर से दुनियाभर में तहलका मचा है। 2000 के दशक के आखिर में वॉशिंगटन म्यूचुअल के डूबने के बाद यह अमेरिका में किसी बड़े बैंक के डूबने की पहली घटना है। हालांकि, तब ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को बर्बादी की स्थिति में ला खड़ा किया था। इस बार 2008 जैसी फाइनेंशियल क्राइसिस नहीं है। फिर भी एक बड़े अमेरिकी बैंक के डूबने से लाखों डिपॉजिटर्स को बड़ा झटका लगा है।
ज्यादा इंटरेस्ट रेट्स पर डिपॉजिट जुटाना महंगा पड़ा
SVB का बहुत ज्यादा एक्सोजर स्टार्टअप्स सेक्टर में था। खासकर इसने उन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को लोन दिए थे, जिन्होंने वेंचर कैपिटल से पैसे जुटाए थे। इनमें कई बड़े स्टार्टअप्स भी शामिल हैं। ये स्टार्टअप्स और इनके एग्जिक्यूटिव्स सिलिकॉन वैली बैंक के कस्टमर्स भी थे। बैंक ने दूसरे बैंकों के मुकाबले ज्यादा इंटरेस्ट रेट्स पर डिपॉजिट जुटाया था। इस डिपॉजिट के इंटरेस्ट को चुकाने के लिए बैंक ने अपना काफी पैसा बॉन्ड्स में इनवेस्ट किया था। तब बॉन्ड्स की कीमतें अच्छे लेवल पर थीं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ने इंटरेस्ट रेट्स बढ़ाने शुरू नहीं किए थे।
इंटरेस्ट रेट्स में लगातार बढ़तरी को झेल नहीं पाया बैंक
पिछले साल की शुरुआत में Federal Reserve ने इंटरेस्ट रेट्स बढ़ाने शुरू कर दिए। इससे बॉन्ड की चमक घटने लगी। इंटरेस्ट रेट्स को लेकर Federal Reserve के आक्रामक रुख को देखते हुए बॉन्ड्स मार्केट पर दबाव बढ़ने लगा। फेडरल रिजर्व के लगातार इंटरेस्ट रेट्स बढ़ाने से अमेरिकी में पॉलिसी रेट्स जीरो से बढ़कर करीब 5 फीसदी तक पहुंच गया है। इससे उन बॉन्ड्स की कीमतें बहुत गिर गई हैं, जिनमें सिलिकॉन वैली बैंक ने इनवेस्ट किया था। आम तौर पर इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने की स्थिति में बॉन्ड्स की चमक घटती है। जब इंटरेस्ट रेट्स घट रहा होता है तब बॉन्ड की चमक (कीमतें) बढ़ती है।
SVB ने रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स के पालन की कभी परवाह नहीं की
एसवीबी का एक दूसरी कमी यह थी कि उसने बहुत कम कैश अपने पास रखा था। ज्यादातर पैसा उसने स्टार्टअप्स को लोन देने में खर्च कर दिया था। फाइनेंशियल मार्केट में लिक्विडिटी घटने पर स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो गया। पिछले एक साल से स्टार्टअप्स को फंड जुटाने में बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर उनके बिजनेस और वैल्यूएशंस पर भी पड़ा है। इससे SVB पर दबाव बढ़ गया, क्योंकि उसने इन स्टार्टअप्स को काफी पैसा लोन के रूप में दिया था। SVB की छवि पहले से ऐसे बैंक की थी, जो रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स के पालन में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाता था।
एसेट-लायबिलिटी मिसमैच की स्थिति खतरनाक
एक समय आया जब SVB की लायबिलिटी उसके एसेट्स के मुकाबले ज्यादा हो गई। आखिर में उसने बॉन्ड्स बेचकर पैसे जुटाने की कोशिश की। लेकिन, 21 अरब डॉलर के बॉन्ड बेचने से उसे 1.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। नुकसान उठाकर बॉन्ड बेचने की खबर 8 मार्च को आते ही डिपॉजिटर्स और इनेवस्टर्स में कोहराम मच गया। यह धारणा बन गई कि सिलिकॉन वैली बैंक की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। बैंक की ब्रांच के बाहर डिपॉजिटर्स की लाइन लग गई। इस खबर से इनवेस्टर्स ने शेयरों के बेचना शुरू कर दिया, जिससे शेयर के प्राइस 60 फीसदी तक टूट गए।