आपके बैंक अकाउंट में अप्रैल की सैलरी क्रेडिट होते ही आपकी कंपनी का एचआर डिपार्टमेंट आपके इनवेस्टमेंट प्लान (Investment Plan) के बारे में पूछना शुरू कर देता है। पहली बार नौकरी करने वाले लोगों को यह काफी मुश्किल लगता है। लेकिन, यह उतना मुश्किल है नहीं, जितना यह दिखता है। इसके लिए आपको थोड़ा अपने फाइनेंस के बारे में सोचना पड़ेगा। सबसे पहले तो यह देखना होगा कि क्या आपने एजुकेशन लोन (Education Loan) लेकर पढ़ाई की है। अगर हां तो आपको उसे चुकाने पर ध्यान देना होगा। ऐसा नहीं करने पर पर आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो जाएगा, जिससे आपको भविष्य में लोन मिलने में दिक्कत आएगी।
एजुकेशन लोन के साथ अच्छी बात यह है कि इसके इंटरेस्ट पर आपको इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80ई के तहत इस पर टैक्स-छूट मिल जाती है। इसके लिए आपको बैंक से सर्टिफिकेट लेना होगा। फिर आप डिडक्शन का दावा कर सकते हैं। इससे आपको अपनी टैक्स लायबिलिटी कम करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही आप एजुकेशन लोन के बोझ से फ्री हो जाएंगे।
EPF का भी रखना होगा ध्यान
आपको अपने एंप्लॉई प्रोविडेंट फंड का भी ध्यान रखना होगा। इस पर भी आपको टैक्स-छूट मिलती है। अगर आप किराए के घर में रहते हैं तो आप HRA पर टैक्स-छूट का दावा कर सकते हैं। टैक्स2विन के सीईओ अभिषेक सोनी ने कहा, "एचआरए पर टैक्स बेनेफिट क्लेम करने के लिए आपको अपना रेंट एग्रीमेंट सब्मिट करना होगा। इसके अलावा आपको किराए की रसीद भी देनी होगी।"
टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट
इसके बाद बारी आती है टैक्स-सेविंग्स की। टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट न सिर्फ आपको टैक्स बचाने में मदद करता है बल्कि लंबी अवधि में आपके लिए अच्छी वेल्थ भी तैयार करता है। इस वेल्थ का इस्तेमाल आप हायर एजुकेशन, घर या गाड़ी खरीदने के लिए कर सकते हैं। इसलिए सबसे जरूरी है कि आप अपने गोल यानी लक्ष्य तय कर लें। आप जितना जल्द यह काम करेंगे, आपके लिए उतना अच्छा रहेगा।
इंश्योरेंस और इनवेस्टमेंट के बीच फर्क
सेबी-रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर प्रियदर्शिनी मुले का कहना है कि कई लोग इंश्योरेंस और इनवेस्टमेंट को मिक्स करते हैं। ऐसा करना गलत है। खासकर आपको इंश्योरेंस कंपनियों के एंडॉमेंट प्लान में निवेश करने से बचना चाहिए। अगर आप इनकम टैक्स के लोअर ब्रेकेट में आते हैं और रिस्क नहीं लेना चाहते हैं तो आपके नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और टैक्स-सेविंग्स बैंक डिपॉजिट में निवेश करना ठीक रहेगा।
मुले ने कहा कि अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो आप म्यूचुअल फंड की ELSS के बारे में सोच सकते हैं। यह टैक्स सेविंग्स स्कीम है। इसका रिटर्न बहुत अट्रैक्टिव है, क्योंकि यह अपना पैसा शेयरों में निवेश करती है। ऐसी स्कीम के लिए अपना 80 फीसदी पैसा शेयरों में निवेश करना जरूरी है। लेकिन, इसमें 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। हालांकि, यह टैक्स-सेविंग्स सभी ऑप्शंस में सबसे कम है।
आपके लिए टर्म इंश्योरेंस खरीदना फायदेमंद रहेगा। इसकी वजह यह है कि उम्र जितनी कम होती है, इंश्योरेंस का प्रीमियम उतना कम होता है। आने वाले समय में आपकी जिम्मेदारी बढ़ेगी। आप पर परिवार चलाने की जिम्मेदारी आएगी। ऐसे में आपके पास पर्याप्त इंश्योरेंस कवर होना जरूरी है। साथ ही आपको मेडीक्लेम पॉलिसी भी खरीद लेना ठीक रहेगा। कई कंपनियां अपने एंप्लॉयर को हेल्थ पॉलिसी देती हैं, लेकिन नौकरी छोड़ते या बदलते ही इस पॉलिसी का लाभ मिलना बंद हो जाता है। इसलिए अपनी हेल्थ पॉलिसी होना जरूरी है।