क्या आपने कंपनी से Form 16 ले लिया है? जानिए उसमें आपको क्या चेक करना जरूरी है

Form 16 में दी गई जानकारियों को चेक करना इसलिए जरूरी है कि आपको अपना इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) इसी के आधार पर फाइल करना होगा

अपडेटेड Jun 21, 2022 पर 5:50 PM
फॉर्म 16 के दो हिस्से होते हैं। पहला पार्ट A और दूसरा पार्ट B है।

क्या अपना फॉर्म 16 (Form 16) आपने चेक कर लिया है? कंपनियां अपने एप्लॉयीज को 15 जून तक फॉर्म 16 जारी कर देती हैं। इसमें पिछले फाइनेंशियल ईयर में आपको कंपनी से मिली सैलरी इनकम, उस पर काटा गया टैक्स (TDS), टैक्स के दायरे से बाहर आने वाले अलाउंसेज शामिल होते हैं।

इन जानकारियों को चेक करना इसलिए जरूरी है कि आपको अपना इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) इसमें दी गई जानकारियों के आधार पर फाइल करना होगा।

 


फॉर्म 16 के दो हिस्से होते हैं। पहला पार्ट A और दूसरा पार्ट B है। सबसे पहले आपको इसमें अपना पैन चेक कर लेना चाहिए, जो TDS सर्टिफिकेट पर लिखा होगा। उसके बाद आपको कंपनी की तरफ से काटे गए टैक्स को देखना होगा। कंपनी हर महीने TDS काटती है। लेकिन फॉर्म 16 में यह तिमाही आधार पर दिखाई देता है।

फॉर्म 26AS को भी आपको ध्यान से देखना होगा। इसकी वजह यह है कि इसमें आपकी अलग-अलग इनकम पर काटे गए टैक्स और आपके पैन के साथ उसके जमा होने की जानकारी होती है। इसमें सैलरी इनकम पर टैक्स, इंटरेस्ट इनकम पर टैक्स, म्यूचुअल फंड या कंपनियों की तरफ से मिले डिविडेंड पर टैक्स शामिल होता है।

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फॉर्म 16 के पार्ट B में कंपनी से मिली सैलरी का ब्यौरा होता है। इसमें ग्रॉस इनकम, अलाउंसेज, 80सी, 80डी के तहत मिलने वाला डिडक्शन शामिल होता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि अगर आपने इनकम टैक्स का नया सिस्टम सेलेक्ट किया है तो फिर आप टैक्स से छूट वाले अलाउन्सेज और डिडक्शन के हकदार नहीं होंगे।

कंपनी एंप्लॉयी से वित्त वर्ष की शुरुआत में ही उस साल आपकी तरफ से टैक्स छूट वाले माध्यमों में होने वाले निवेश की जानकारी मांग लेती है। फिर कैलकुलेशन के बाद अगर आपकी सैलरी इनकम पर टैक्स बन रहा होता है तो हर महीने वे टैक्स काटना शुरू कर देती हैं। फिर, जनवरी महीने में वे आपसे एक्चुअल इनवेस्टमेंट प्रूफ मांगती हैं।

कपनियां एक्चुअल इनवेस्टमेंट प्रूफ के आधार पर दोबारा आपकी टैक्स लायबिलिटी तय करती हैं। अगर आपकी टैक्स लायबिलिटी ज्यादा आती है तो फिर जनवरी से मार्च के दौरान आपकी सैलरी इनकम पर अतिरिक्त टैक्स काटती हैं।

अगर आपने फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में जॉब चेंज किया है तो प्री-फिल्ड ITR फॉर्म में दोनों (पुरानी और नई) कंपनियों से मिली सैलरी का ब्योरा होगा। आपको अपनी टैक्सेबल सैलरी को जानने के लिए दोनों कंपनियों से फॉर्म 16 लेना होगा। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए दोनों कंपनियों का फॉर्म 16 आपके पास होना जरूरी है।

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