एक सीमा से अधिक पैसे जमा करने या निकालने पर देना होगा पैन या आधार, 26 मई से लागू होंगे नए नियम

CBDT ने यह भी कहा है कि अगर कोई व्यक्ति बैंक या पोस्ट ऑफिस में करेंट अकाउंट या कैश क्रेडिट अकाउंट ओपन करता है तो उसे पैन देना होगा। CBDT ने मंगलवार को इन नियमों को नोटिफाई किया है

अपडेटेड May 12, 2022 पर 10:27 AM
यह नियम कोऑपरेटिव बैंकों में पैसा जमा करने या निकालने पर भी लागू होगा।

सरकार ब्लैक मनी के इस्तेमाल पर अंकुश लगाना चाहती है। इसके लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज यानी CBDT ने नया नियम लागू किया है। इसके तहत एक फाइनेंशियल ईयर में बैंक अकाउंट या पोस्ट ऑफिस में 20 लाख रुपये से ज्यादा डिपॉजिट करने या निकालने (Withdrawal) पर पैन या आधार बताना होगा। यह नियम 26 मई से लागू हो जाएंगे।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि 20 लाख रुपये की यह सीमा एक या ज्यादा बैंक अकाउंट में डिपॉजिट पर लागू होगी। इसका मतलब है कि अगर एक फाइनेंशियल ईयर में आप अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में अलग-अलग अमाउंट डिपॉजिट या विड्रॉ करते हैं और उनका कुल जोड़ 20 लाख रुपये से ज्यादा है तो आपको पैन या आधार देना होगा। यह नियम कोऑपरेटिव बैंकों में पैसा जमा करने या निकालने पर भी लागू होगा।

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CBDT ने यह भी कहा है कि अगर कोई व्यक्ति बैंक या पोस्ट ऑफिस में करेंट अकाउंट या कैश क्रेडिट अकाउंट ओपन करता है तो उसे पैन देना होगा। सीबीडीटी ने मंगलवार को इन नियमों को नोटिफाई किया है। इसमें यह कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह का ट्रांजेक्शन करना चाहता है तो उसे ट्रांजेक्शन की तारीख से कम से कम 7 दिन पहले पैन के लिए अप्लाई कर देना चाहिए।

पहले से ही एक दिन में 50.000 रुपये डिपॉजिट करने के लिए पैन देना अनिवार्य है। एक बार में 50,000 रुपये से ज्यादा मूल्य के म्यूचुअल फंड्स और डिबेंचर खरीदने पर भी पैन देना अनिवार्य है। एक बार में 50 हजार रुपये से ज्यादा के फॉरेन एक्सचेंज और होटल बिल चुकाने पर भी पैन का ब्योरा देना जरूरी है।

पैन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने का मतलब है कि इनकम टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स की आर्थिक गतिविधियों पर करीबी नजर रखना चाहता है। इससे विभाग को यह पता लगाने में आसानी होगी की टैक्सपेयर्स का खर्च उसकी कमाई से मैच करता है या नहीं। अगर किसी टैक्सपेयर्स की कमाई कम है, लेकिन वह ज्यादा मूल्य के ट्रांजेक्शन करता है तो इसका मतलब है कि उसके पास ब्लैक मनी है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पहले से ही ऐसे ट्रांजेक्शन की लिस्ट सार्वजनिक कर चुका है, जिसकी जानकारी टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग में देना जरूरी है। इसका भी मकसद टैक्सपेर्यस की कमाई और खर्च पर नजर रखना है।

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