TDS New Rule: सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर को भी देना होगा आज से TDS, जानिए किन चीजों पर लगेगा ये टैक्स

अगर कोई बेनेफिट / अन्य सुविधाएं 1 जुलाई, 2022 से पहले दी जाती है तो इस पर कोई टैक्स डिडक्ट नहीं किया जाएगा। लेकिन इस अमाउंट का इस्तेमाल 20,000 रुपये की सीमा के कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा

अपडेटेड Jul 01, 2022 पर 7:33 AM
इन प्रावधानों के लागू होने से हम ज्यादा टैक्स कंप्लायंस और टैक्स विवाद के युग की तरफ बढ़ रहे हैं

TDS New Rule:  अगर आप सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हैं तो आज से आपको भी 10% TDS चुकाना होगा। यह टैक्स बिजनेस से जुड़े बेनेफिट या अन्य सुविधाओं पर इस सेक्शन के तहत TDS के नियम क्या होंगे। इस सेक्शन को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के बजट में शुरू किया गया है। CBDT ने हाल में सेक्शन 194R से जुड़ी नई गाइडलाइंस जारी की है।

सेक्शन 194R के प्रावधान 1 जुलाई, 2022 से लागू होंगे। यह ऐसे बिजनेसेज या व्यक्ति पर लागू होंगे जो किसी एक फाइनेंशियल ईयर में 20,000 रुपये से ज्यादा के बेनिफिट या अन्य सुविधाएं किसी दूसरे व्यक्ति को देता है। यह पेमेंट बिजनेस से जुड़े बेनेफिट या अन्य सुविधाओं के लिए होने चाहिए। बेनेफिट या अन्य सुविधाएं देने वाले व्यक्ति को इस पेमेंट पर 10 फीसदी TDS काटना होगा।

CBDT ने 16 जून को जारी सर्कुलर में इस सेक्शन से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया है।


इस सर्कुलर की मुख्य बातें ये हैं:

1. बेनेफिट या अन्य सुविधाओं का पेमेंट करने वाले बिजनेस या व्यक्ति को यह चेक करने की जरूरत नहीं है कि अमाउंट (बेनेफिट से जुड़ा अमाउंट) इसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति के हाथ में जाने के बाद टैक्स के दायरे में आता है या नहीं या किस सेक्शन के तहत इस पर टैक्स लगेगा।

2. बेनेफिट या अन्य सुविधाओं पर टैक्स काटना जरूरी है चाहे वे कैश में हो या किसी चीज के रूप में या थोड़ा कैश और थोड़ा चीज के रूप में हो।

3. बेनेफिट या अन्य सुविधाएं कैपिटल ट्रांजेक्शन के रूप में हो सकती हैं। CBDT के सर्कुलर में इसके कई उदाहरण दिए गए हैं, जिनमें कंपनी के डायरेक्टर को दिए गए Consent Decrees, Loan Waiver, Rent free accommodation, Furniture or Fixtures, गिफ्ट के रूप में दी गई कार, जमीन आदि शामिल हैं।

4. CBDT के सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि हालांकि कस्टमर्स को लिस्टेड सेल प्राइस पर दिए गए डिस्काउंट्स, कैश डिस्काउंट्स या रिबेट्स तार्किक रूप से बेनेफिट और अन्य सुविधाओं के तहत आते हैं। लेकिन, ये विक्रेता को मुश्किल में डाल सकते हैं और इसलिए इन्हें इस सेक्शन के दायरे के बाहर रखा गया है। कस्टमर्स को सेल्स डिस्काउंट्स, कैश डिस्काउंट्स या रिबेट्स दिए जाते हैं। ऐसी स्थितियां आती हैं जिसमें सेलर सेम प्राइस पर ज्यादा क्वांटिटी देता है। जैसे 10 यूनिट्स के प्राइस पर वह 10 यूनिट्स की जगह 12 यूनिट्स देता है।

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इस सर्कुलर में ऐसे उदाहरण भी दिए गए हैं जिन पर TDS काटने के मकसद से विचार किया जा सकता है:

A. फ्री सैंपल्स का डिस्ट्रिब्यूशन

B. जहां एक व्यक्ति कार, टीवी, कंप्यूटर्स, गोल्ड कॉइन, मोबाइल फोन आदि के रूप में कैश या चीज के रूप में इनसेंटिव (डिस्काउंट, रिबेट के अलावा) देता है।

C. जब एक व्यक्ति खास टारगेट को पूरा करने पर रिसिपियंट्स और उसके रिलेटिव्स के ट्रिप को स्पॉन्सर करता है।

D. जब एक व्यक्ति एक इवेंट के लिए फ्री टिकट देता है।

E. जब एक व्यक्ति मेडिकल प्रैक्टिसनर्स को फ्री मेडिसिन सैंपल्स देता है।

अगर रिसिपियंट्स बिजनेस एनटिटी है तो ये सुविधाएं/बेनेफिट्स मालिक/डायरेक्टर/एंप्लॉयी के द्वारा इस्तेमाल की जा सकती हैं और ऐसे इनटिटी के लिए टीडीएस डिडक्ट किया जाएगा।

अगर किसी गवर्नमेंट इनटिटी जैसे सरकारी हॉस्पिटल जो किसी तरह का बिजनेस या प्रोफेशन नहीं करता है, उसे दिए जाने वाले बेनेफिट्स या सुविधाओं पर TDS डिडक्ट नहीं किया जाएगा।

अगर इस तरह के बेनेफिट्स को देने वाला व्यक्ति इन्हें खरीदता है तो ऐसी सुविधाओं/बेनेफिट्स की वैल्यू उस पर्चेज प्राइस पर लगाई जाएगी जिसका इस्तेमाल वह इन्हें अपने कस्टमर्स को बेचने के लिए करता है।

5. अगर वीडियो या ऑडियो बनाने के लिए किसी सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को प्रोडक्ट दिया जाता तो वह तब टैक्स के दायरे में आएगा जब उसके इस्तेमाल के ऐसा व्यक्ति उस प्रोडक्ट को अपने पास रख लेता है। हालांकि, अगर सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर इस्तेमाल के बाद उस प्रोडक्ट को वापस कर देता है तो उस पर टैक्स नहीं देना होगा।

7. अगर कंसल्टेंट्स या दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स/एसोसिएट्स को रिइम्बर्समेंट के रूप में बेनेफिट या अन्य सुविधाएं दी जाती है तो उस पर TDS लागू होगा। उदाहरण के लिए अगर एक कंसल्टेंट को ट्रेवलिंग या बोर्डिंग या लॉजिंग की सुविधा दी जाती है तो इनके रिइम्बर्समेंट के रूप में एक्सपेंसेज क्लेम किए जाने पर TDS काटना होगा। अगर बिजनेस इनटिटी की तरफ से प्रोवाइडर को सीधे पेमेंट किया जाता है तो उस पर TDS लागू होगा। उदाहरण के लिए सर्विस प्रोवाइडर को एक्सपेंस के रिइम्बर्समेंट की जगह होटर दिया जाए।

7. एक्सपेंसेज जो बिजनेस क्रॉन्फ्रेंसे के नेचर के होंगे

(i) नया प्रोडक्ट लॉन्च किया जा रहा होअगर डीलर/बिजनेस कॉन्फ्रेंस डीलर/कस्टमर्स को निम्नलिखित बातों के बारे में एजुकेट करने के लिए आयोजित किया जाता है तो TDS नहीं लगेगा:

(ii) यह बताने के लिए डिस्कशन कि कैसे यह प्रोडक्ट दूसरों से बेहतर है

(iii) डीलर्स/कस्टमर्स से ऑर्डर लेने के लिए

(iv) डीलर्स/कस्टमर्स को सेल्स टेक्निक सिखाने के लिए

(v) डीलर्स/कस्टमर्स के सवालों के जवाब देने के लिए

(vi) डीलर्स/कस्टमर्स के साथ अकाउंट्स के रिकॉन्सिलेशन के लिए

हालांकि, TDS निम्नलिखित स्थितियों में डिडक्ट करना होगा:

(i) अगर कॉन्फ्रेंस खास टारगेट को हासिल करने वाले डीलर्स को इनसेंटिव्स/बेनेफिट्स देने के लिए आयोजित किया जा रहा हो

(ii) कॉन्फ्रेंस से जुड़ा अगर कोई लेजर कंपोनेंट हो तो उससे जुड़ा खर्च

(iii) कॉन्फ्रेंस में शामिल हो रहे व्यक्ति के परिवार का सदस्य अगर शामिल हो रहा है तो उस पर आने वाले खर्च

(iv) कॉन्फ्रेंस की तारीख से पहले या उसके बाद परिवार के सदस्य पर आने वाले खर्च पर

8. अगर बेनेफिट किसी चीज के रूप में हो या आंशिक रूप से चीज के रूप में हो (और कैश टीडीएस पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो) तो प्रोवाइडर द्वारा चुकाया गया टैक्स अगर रिसिपियंट्स से रिकववर नहीं किया गया है तो इसे रिसिपियंट्स को दिया गया बेनेफिट माना जाएगा। ऐसी स्थिति में जब इसे रिसिपियंट्स खुद एडवॉन्स टैक्स के रूप में चुका देता तो प्रोवाइडर को रिसिपियंट्स से एक डिक्लयेरशन और एडवांस टैक्स पेमेंट चालान की कॉपी लेनी होगी और फॉर्म 26Q में रिपोर्ट करनी होगी।

9. अगर कोई बेनेफिट / अन्य सुविधाएं 1 जुलाई, 2022 से पहले दी जाती है तो इस पर कोई टैक्स डिडक्ट नहीं किया जाएगा। लेकिन इस अमाउंट का इस्तेमाल 20,000 रुपये की सीमा के कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

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