भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देश पर शुरू हुई नई सतत चेक निपटान प्रणाली के संचालन में अभी भी कुछ शुरुआती तकनीकी और संचालन संबंधी समस्याएं देखी जा रही हैं। इस नई प्रणाली के तहत चेकों का भुगतान अब दो कार्य दिवसों की जगह कुछ ही घंटों में सुनिश्चित किया जाता है, जिससे ग्राहकों को तेज और बेहतर सेवा मिल सके।
एनपीसीआई ने बताया कि 4 अक्टूबर 2025 से अब तक केंद्रीय प्रणाली के माध्यम से कुल 2.56 करोड़ चेकों का भुगतान किया जा चुका है, जिनकी कुल राशि ₹3.01 लाख करोड़ से अधिक है। सभी बैंक उन चेकों के निपटान की पुष्टि कर चुके हैं और बैंकों को सलाह दी गई है कि वे राशि को ग्राहकों के खाते में तुरंत जमा करें।
हालांकि, कुछ बैंकों के सिस्टम और केंद्रीय प्रणाली में गड़बड़ियों के कारण कभी-कभी चेक भुगतान में देरी हो जाती है। एनपीसीआई ने माना कि शुरुआती दिनों में इन कारणों से ग्राहकों को परेशानी हुई और इसके लिए माफी भी मांगी।
एनपीसीआई ने भरोसा दिलाया कि ये दिक्कतें जल्द ही दूर कर दी जाएंगी और प्रक्रिया पूरी तरह से सुचारू हो जाएगी। इसके तहत हर दिन चेक निपटान को संभव बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राहकों से सहयोग और समझ बनाए रखें और जरूरी हो तो डिजिटल पेमेंट के अन्य माध्यमों जैसे यूपीआई, IMPS आदि का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि लेन-देन में कोई रुकावट न हो।
यह नई चेक निपटान प्रणाली भारत में भुगतान और निपटान प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए आरबीआई और एनपीसीआई द्वारा मिलकर शुरू की गई है। एनपीसीआई इस व्यवस्था को पूरी तरह से सफल बनाने और ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के लिए तत्पर है।
ग्राहकों को भी सलाह दी जाती है कि वे चेक निपटान में देरी होने की स्थिति में धैर्य रखें और यदि आवश्यक हो तो सीधे अपने बैंक से संपर्क करें। इस बदलाव से चेक भुगतान प्रणाली में सुधार की उम्मीद है, जिससे भविष्य में भुगतान संबंधी समस्याएं कम होंगी और बैंकिंग सिस्टम अधिक दक्ष व ग्राहक अनुकूल बनेगा।