अमेरिका के मशहूर इनवेस्टर वॉरेन बफे की निवेश की सोच दशकों से दुनिया भर के निवेशकों को प्रभावित करती रही है। 1977 में, 47 साल की उम्र में उन्होंने Berkshire Hathaway के शेयरहोल्डर्स को अपनी पहली चिट्ठी लिखी थी।
अमेरिका के मशहूर इनवेस्टर वॉरेन बफे की निवेश की सोच दशकों से दुनिया भर के निवेशकों को प्रभावित करती रही है। 1977 में, 47 साल की उम्र में उन्होंने Berkshire Hathaway के शेयरहोल्डर्स को अपनी पहली चिट्ठी लिखी थी।
उस समय कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 2.19 करोड़ डॉलर था। चिट्ठी में बफे ने निवेश और बिजनेस से जुड़े कई अहम विचार रखे थे। करीब पांच दशक बाद भी उनके ये 5 सबक शेयर बाजार के निवेशकों के लिए काम के हैं।
पहले बिजनेस को समझें, फिर शेयर खरीदें
शेयर चुनने के लिए बफे ने चार बातों की एक चेकलिस्ट दी थी। पहला, बिजनेस ऐसा होना चाहिए जिसे आप समझ सकें। दूसरा, उसके लंबे समय के ग्रोथ प्रॉस्पेक्ट्स अच्छे होने चाहिए।
तीसरा, कंपनी का मैनेजमेंट ईमानदार और काबिल होना चाहिए। चौथा, शेयर सही कीमत पर मिलना चाहिए। बफे ने साफ कहा था कि वह सिर्फ इसलिए शेयर नहीं खरीदते थे कि कीमत कुछ समय में ऊपर जा सकती है। वो लंबे समय को ध्यान में रखकर शेयर चुनते हैं।
शेयर गिरने पर हमेशा डरें नहीं
बफे का मानना था कि अगर किसी कंपनी का बिजनेस अच्छा चल रहा है, तो उसके शेयर का भाव गिरना निवेशक के लिए मौका भी हो सकता है। कम कीमत पर उसी अच्छे बिजनेस में ज्यादा खरीदारी की जा सकती है।
यही बात SIP निवेशकों के लिए भी अहम है। बाजार गिरने पर निवेश जारी रखने से कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। फिर इन यूनिट्स को लंबी अवधि तक कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है।
गलतियों को मानना जरूरी है
1977 में बर्कशायर का टेक्सटाइल बिजनेस लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा था। बफे ने स्वीकार किया कि वह पहले भी इसके बेहतर नतीजों का अनुमान लगाकर गलत साबित हुए थे।
इससे उन्होंने एक बड़ा सबक लिया। उन्होंने कहा कि बेहतर है ऐसे बिजनेस में काम किया जाए, जहां परिस्थितियां आपके पक्ष में हों। यानी बिजनेस को लगातार मुश्किल हालात से लड़ना न पड़े। अच्छी मैनेजमेंट भी कमजोर बिजनेस मॉडल को हमेशा नहीं बचा सकती।
सिर्फ बढ़ती कमाई को सफलता न मानें
बफे ने कहा कि सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि कंपनी का प्रॉफिट बढ़ रहा है या नहीं। कई कंपनियों का प्रॉफिट इसलिए बढ़ता है क्योंकि वे लगातार ज्यादा पूंजी लगा रही होती हैं।
उनके मुताबिक, यह देखना ज्यादा जरूरी है कि कंपनी अपनी पूंजी पर कितना रिटर्न कमा रही है। इसी से बिजनेस की असली कैपिटल एफिशिएंसी का बेहतर अंदाजा लगाया जा सकता है।
ऐसा बिजनेस बेहतर, जिसे बार-बार ज्यादा पैसा न चाहिए
बफे ने अपनी बर्कशायर हैथवे की रिटेल कंपनी See's Candies का उदाहरण दिया था। कंपनी का प्रॉफिट बढ़ा, लेकिन इसके लिए बहुत ज्यादा अतिरिक्त पूंजी लगाने की जरूरत नहीं पड़ी।
उनका मानना था कि शानदार बिजनेस वह है, जो निवेश की गई पूंजी पर अच्छा रिटर्न दे और ग्रोथ के लिए बार-बार भारी निवेश न मांगता हो। ऐसे बिजनेस में कैपिटल एफिशिएंसी ज्यादा होती है।
लंबे समय की तस्वीर ज्यादा अहम
बफे ने निवेशकों को एक साल के नतीजों के आधार पर किसी कंपनी का फैसला करने से भी सावधान किया था। उन्होंने Berkshire के इतिहास का उदाहरण देते हुए बताया कि एक समय कंपनी का बिजनेस काफी मजबूत था, लेकिन बाद के वर्षों में उसकी हालत कमजोर होती चली गई।
इसलिए किसी एक साल का प्रॉफिट या शेयर का शॉर्ट टर्म प्रदर्शन पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। निवेशकों को बिजनेस की लंबी अवधि की ग्रोथ, उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मैनेजमेंट की गुणवत्ता को देखना चाहिए।
1977 में Berkshire Hathaway के Class A शेयर की कीमत करीब 75 से 100 डॉलर के बीच थी। 2026 में, 96 साल की उम्र में पहुंचे वॉरेन बफे के दौर में यही शेयर 1 सितंबर तक करीब 7.52 लाख डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
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