पहली बार निवेश करने वाले व्यक्ति का एसेट एलोकेशन कैसा होना चाहिए?

एसेट एलोकेशन न सिर्फ आपको निवेश से अट्रैक्टिव रिटर्न कमाने में मदद करता है बल्कि यह अचानक शेयर या फाइनेंशियल मार्केट में आई गिरावट की स्थिति में आपके पैसे की सुरक्षा भी करता है। एसेट एलोकेशन अलग-अलग इनवेस्टर्स के लिए अलग-अलग होता है

अपडेटेड Mar 21, 2023 पर 8:22 AM
ASSET ALLOCATION हर इनवेस्टर के रिस्क लेने की क्षमता, रिटर्न को लेकर एक्सपेक्टेशन और दूसरी चीजों पर निर्भर करता है।

क्या आप निवेश शुरू करने जा रहे हैं? अगर हां तो आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि आपका एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) कैसा होना चाहिए। दरअसल, एसेट एलोकेशन का मतलब सिर्फ इस बात का है कि आपको कितना पैसा शेयरों में, कितना पैसा पीपीएफ में या दूसरे एसेट्स में लगाना चाहिए। अक्सर फाइनेंशियल एसेट एलोकेशन का ध्यान रखने की सलाह देते हैं। एसेट एलोकेशन सभी इनवेस्टर्स के लिए एक जैसा नहीं होगा। यह हर इनवेस्टर के रिस्क लेने की क्षमता, रिटर्न को लेकर एक्सपेक्टेशन और दूसरी चीजों पर निर्भर करता है। इसलिए आपके लिए भी एसेट एलोकेशन के बारे में समझ लेना जरूरी है।

फिफ्टी-फिफ्टी थ्योरी

इसके लिए हम ऐसी कुछ स्थितियों के बारे में बता रहे हैं, जो आपको अपने हिसाब से एसेट एलोकेशन के बारे में फैसला लेने में मदद कर सकती है। पहली स्थिति में इक्विटी और बॉन्ड के बीच एसेट एलोकेशन का रेशियो 50:50 है। इसका मतलब है कि आपको अपना 50 फीसदी पैसा इक्विटी में लगाना होगा। बाकी 50 फीसदी पैसा डेट में लगाना होगा। इक्विटी में 50 फीसदी पैसा निवेश करने से शेयर बाजार से मिलने वाले मुनाफे का लाभ उठाय जा सकता है। उधर, 50 फीसदी पैसा सुरक्षित माध्यमों में होने से आपका रिस्क कम हो जाएगा। ऐसे इनवेस्टर जिनकी उम्र कम है, उनके लिए यह एसेट एलोकेशन फायदेमंद रहेगा।


यह भी पढ़ें : NRI को क्रिप्टो से हुए मुनाफे पर किस तरह टैक्स चुकाना होगा?

इक्विटी में ज्यादा एलोकेशन

60:40 रेशियो वाले एसेट एलोकेशन ने इनवेस्टर्स को अच्छा रिटर्न दिया है। इंडिया में ज्यादातर इनवेस्टर इस एसेट एलोकेशन का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए 60 फीसदी निवेश निफ्टी 50 में किया जा सकता है, बाकी 40 फीसदी का निवेश क्रिसिल कंपोजिट बॉन्ड फंड इंडेक्स में किया जा सकता है। 5 साल के रोलिंग रिटर्न के आधार पर इस एसेट एलोकेशन का रिटर्न 9.25 फीसदी रहा है। इसकी जगह 100 फीसदी एलोकेशन इक्विटी में करने पर रिटर्न बढ़कर 11.29 फीसदी सालाना पहुंच गया है। जाहिर है कि इक्विटी में एलोकेशन बढ़ाने पर रिटर्न बढ़ेगा, लेकिन आपका जोखिम भी बढ़ जाएगा।

डायनेमिक एसेट एलोकेशन

तीसरा विकल्प डायनेमिक एसेट एलोकेशन का है। इसमें जब आप यंग होते हैं यानी आपकी कम्र होती है तो आप ज्यादा निवेश इक्विटी में कर सकते हैं। कुछ साल तक आप इक्विटी में निवेश बढ़ाना जारी रखते हैं। यह तब तक चलता रहता है जब तक आप पर जिम्मेदारियों का बोझ कम होता है। हर साल नौकरी में इक्रीमेंट होने पर आप इक्विटी में एलोकेशन बढ़ा सकते हैं। इसमें भी शुरुआत आप 50:50 रेशियो के साथ कर सकते हैं। लेकिन, यह कुछ सालों तक इसमें इक्विटी का वेटेज बढ़ता जाएगा। आपके 50 साल के होने तक होने तक इक्विटी का पलड़ा भारी रहेगा। उसके बाद इक्विटी एलोकेशन बढ़ाने की जगह आपको डेट में एलोकेशन बढ़ाना होगा। यह तब तक चलता रहेगा, जब तक आप रिटायर नहीं कर जाते। यह डायनेमिक एसेट एलोकेशन आपको अट्रैक्टिव रिटर्न कमाने में मदद कर सकता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।