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कहा जाए तो फाइनेंशियल प्लानिंग आसान है, बस निवेश का लक्ष्य तय करने और जोखिम-रिटर्न में तालमेल बिठाने भर का काम है। अपने पैसे की रखवाली के लिए खुद से बेहतर कौन सा व्यक्ति हो सकता है।

लेकिन, समय की कमी और पूरी जानकारी न होने से अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए पेशेवर फाइनेंशियल प्लानर की जरूरत पड़ती है।

फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए समय-समय पर पोर्टफोलियो की जांच करनी पड़ती है, घरेलू-विदेशी शेयर बाजार का रुख देखना पड़ता है और आर्थिक-राजनीतिक बदलावों पर नजर रखनी पड़ती है।

इसके अलावा निवेश के नए विकल्पों की परख करके सही समय पर सही विकल्प का चुनाव करना पड़ता है। इन सभी कामों

को ठीक से करने के लिए प्रशिक्षण और जानकारी की जरूरत पड़ती है।

घरेलू बाजार पर विदेशी बाजारों की हलचल का ज्यादा असर पड़ने लगा है। इसके अलावा निवेशकों के पास विदेशी बाजारों में पैसा लगाने के कई जरिए खुल गए हैं।

साथ ही, बाजार में खबरों का ढ़ेर लगा रहता है, जिसमें से उपयुक्त जानकारी हासिल करने के लिए विशेषज्ञता की जरूरी होती है।

पैसे से संबंधित सभी फैसले दिल से नहीं दिमाग से लेने चाहिए। पेशेवर फाइनेंशियल प्लानर आपके पोर्टफोलियो को तर्कसंगत तरीके से मैनेज करता है।

इसलिए फाइनेंशियल प्लानर को चुनिए, ताकि पोर्टफोलियो मैनेज करने की चिंता से मुक्ति पा सकें और अपने पैसों का आनंद ले सकें।

(इस लेख के लेखक लोवाई नवलाखी सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर हैं, जो इंटरनेशनल मनी मैटर्स के सीईओ भी हैं)