Adhik Maas Shradh Amavasya 2026: आने वाला है पितरों की मुक्ति का सबसे बड़ा दिन, तीन साल में एक बार आती है अधिक मास की अमावस्या

Adhik Maas Shradh Amavasya 2026: अधिक मास की अमावस्या को पितृ शांति के लिए बेहद अहम माना जाता है। यह पवित्र अवसर तीन साल में एक बार मिलता है। इस साल सोमवार के दिन अधिकमास की अमावस्या तिथि पड़ने की वजह से सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 7:00 AM
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन हमारे पूर्वज पितृ लोक से धरती पर आते हैं।

Adhik Maas Shradh Amavasya 2026: इस साथ ज्येष्ठ मास में अधिक मास का अत्यंत दुर्लभ और पवित्र संयोग बना है। अधिक मास की अवधि में पुण्य प्राप्त करने का अवसर दोगुना हो जाता है। इस अवधि में आने वाली विशेष तिथियों का भी अलग महत्व है। 17 मई 2026 को शुरू हुआ ज्येष्ठ अधिक मास अब अपने समापन की ओर है। इस माह की अमावस्या तिथि को पितरों की शांति के लिए बेहद अहम दिन माना जाता है। इस अमावस्या पर पितरों की मुक्ति का असवर तीन साल में एक बार मिलता है। इस साल यह तिथि सोमवार के दिन पड़ रही है, जिससे इस दिन सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। इस दिन पूजा, पाठ, तर्पण, श्राद्ध करने से और हरि कृपा से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।

अधिकमास अमावस्या 2026 तिथि मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 14 जून को दोपहर 12:19 बजे से अधिकमास की अमावस्या तिथि शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन 15 जून को सुबह 08:23 बजे होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर अधिकमास की अमावस्या 15 जून को है। लेकिन उस दिन पितरों का श्राद्ध नहीं हो सकेगा।

अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या की तारीख

दरअसल पितरों का श्राद्ध कर्म दिन में 11 या 11:30 बजे के बाद करने का विधान। 15 जून को अमावस्या तिथि सुबह में ही खत्म हो जा रही है। दोपहर से शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ हो जा रहा है। 14 जून को अमावस्या तिथि दोपहर में प्रारंभ हो रही है, ऐसे में अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या 14 जून को है। उस दिन ही पितरों का श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।

अधिकमास श्राद्ध अमावस्या 2026 मुहूर्त


जो लोग अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या पर अपने पितरों का श्राद्ध, पिंडदान, ब्राह्मण भोज, पंचबलि कर्म आदि करना चाहते हैं, वे लोग दोपहर 12:19 बजे से कर सकते हैं, उस समय से अमावस्या तिथि लग जाएगी। श्राद्ध का काम आपको दोपहर 02:30 बजे तक संपन्न कर लेना चाहिए।

पितरों को कैसे दें तर्पण?

इस दिन अमावस्या तिथि में अपने पितरों के लिए आप तर्पण स्नान के बाद दे सकते हैं। इसके लिए हाथ में जल और काला तिल लेकर कुशा की मदद से तर्पण देना चाहिए। कुशा से तर्पण न देने से वह जल पितरों को प्राप्त नहीं होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उस जल को प्रेत या अन्य अतृप्त आत्माएं ग्रहण कर लेती हैं।

श्राद्ध अमावस्या का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन हमारे पूर्वज पितृ लोक से धरती पर आते हैं। वे अपनी संतान से यह उम्मीद करते हैं कि वे तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि से उनको तृप्त करें। जब वे तृप्त होते हैं तो अपनी संतान को उन्नति का आशीर्वाद देते हैं। जो लोग अमावस्या पर अपने पितरों को तृप्त नहीं करते हैं, उनको पितर श्राप देते हैं, इससे पितृ दोष लगता है।

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