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Adhikmas 2026 Ekadashi: ज्येष्ठ मास में बनेगा 4 एकादशी तिथियों का दुर्लभ संयोग, जानें अधिक मास में कौन सी एकादशी होगी

Adhikmas 2026 Ekadashi: हिंदू धर्म में अधिक मास को विशेष स्थान प्राप्त है। इसमें मांगलिक कार्य नहीं होते, लेकिन ये धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। इस माह में अन्य हिंदू महीनों की तरह दो नहीं 4 एकादशी तिथियां आती हैं। आइए जानें ज्येष्ठ माह में लग रहे अधिक मास की एकादशी तिथियां कौन सी होंगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 25, 2026 पर 5:46 PM
Adhikmas 2026 Ekadashi: ज्येष्ठ मास में बनेगा 4 एकादशी तिथियों का दुर्लभ संयोग, जानें अधिक मास में कौन सी एकादशी होगी
ज्येष्ठ अधिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 मई को होगी, जिसका नाम पद्मिनी एकादशी है।

Adhikmas 2026 Ekadashi: हिंदू धर्म के व्रत-त्योहार हिंदू कैलेंडर पर आधारित होते हैं, जो चंद्र माह के अनुसार चलता है। इसमें हर 3 वर्ष के बाद अधिकमास रहता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास विशेष समय होता है, जिसमें मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इसका कोई स्थायी अधिपति देवता भी नहीं माना जाता है।

लेकिन हिंदू कैलेंडर का यह महीना धार्मिक रूप से अत्यंक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें पूजा, अनुष्ठान, दान आदि कर्मों का विशेष फल मिलता है। हिंदू वर्ष के प्रत्येक माह में यूं तो 24 एकादशियां होती हैं परंतु अधिकमास की 2 एकादशियां जुड़ जाने की वजह से प्रति 3 वर्ष में 26 एकादशियां होती हैं। अधिकमास में परम एकादशी और पद्मिनी एकादशी का व्रत रखे जाने का बहुत महत्व है क्योंकि यह तीन वर्ष बाद ही आती है।

कब से कब तक रहेगा अधिक मास?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लग रहा है, जिससे संवत 2083 12 नहीं 13 महीनों का होगा। ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इसे अधिक मास के अलावा मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

ज्येष्ठ माह में 2 नहीं 4 एकादशी तिथियां होंगी

ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई से होगी। इस माह की अमावस्या 16 मई को होगी और इसके अगले दिन यानी 17 मई से मलमास लग जाएगा। इसमें दो की जगह 4 एकादशी व्रत किए जाएंगे। इसमे सबसे पहले ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी 13 मई को होगी। ज्येष्ठ शुक्ल निर्जला एकादशी 25 जून को होगी।

इसके बाद 17 मई से मलमास लगा जाएगा। इसमें ज्येष्ठ अधिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 मई को होगी, जिसका नाम पद्मिनी एकादशी है। इसके बाद 11 जून को ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत होगा।

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