Gupt Navratri Vrat Parana Time: साल में चार बार नवरात्रि आती है, इनमें से दो गुप्त नवरात्रि हैं। पहली आमतौर पर माघ गुप्त नवरात्रि होती है, जो सर्दियों के महीने माघ में मनाई जाती है। दूसरी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि है, जो आषाढ़ महीने में मनाई जाती है। इनके अलावा, दो नवरात्रि चैत्र और आश्विन माह में मनाई जाती हैं।
इस साल की आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई को शुरू हुई, जिसमें भक्तों ने नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों और दस महाविद्याओं की साधना की। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू हुई गुप्त नवरात्रि का आज 23 जुलाई को आखिरी दिन है। नौ दिनों के व्रत और अनुष्ठान का आज के दिन पारण किया जाएगा। आइए जानें आषाढ़ गुप्त नवरात्रि व्रत के पारण का सही समय और पारण विधि क्या है?
गुप्त नवरात्रि व्रत पारण का समय क्या है?
दृक पंचांग के अनुसार, गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि आज सुबह 5:16 बजे शुरू हुई। नवमी तिथि कल, 23 जुलाई को सुबह 7:03 बजे खत्म होगी, इसी दिन गुप्त नवरात्रि का व्रत रखने वाले सभी लोग अपना व्रत का परण कर सकते हैं।
गुप्त नवरात्रि व्रत पारण का समय
पारण शुभ मुहूर्त : 23 जुलाई को प्रातः सूर्योदय के बाद (सुबह 05:35 AM से 07:03 AM के मध्य नवमी तिथि की समाप्ति के आसपास पारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है)।
यदि आपने नवमी पूजन और कन्या पूजन का संकल्प लिया है, तो पूजा एवं हवन संपन्न करने के पश्चात पारण करें।
पारण और समापन के समय ध्यान रखने योग्य बातें
नवमी तिथि के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद हवन करें।
सामर्थ्य अनुसार छोटी कन्याओं (2 से 10 वर्ष) को भोजन कराएं, तिलक लगाएं और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें।
व्रत का पारण हमेशा सात्विक भोजन से ही करें।
पारण के समय सबसे पहले माता रानी के प्रसाद (जैसे हलवा, पूरी, चना या फल) का सेवन करें।
घट/कलश और अखंड ज्योत का विसर्जन
पारण और पूजा संपन्न होने के बाद ही कलश और बोए गए जौ (जवारे) को पूरे सम्मान के साथ जल में प्रवाहित करें या पवित्र पेड़ के पास रखें।
अखंड ज्योत यदि जल रही हो तो उसे खुद से न बुझाएं, उसे स्वतः शांत होने दें।
पारण के दिन भी घर में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार या मदिरा) का प्रयोग बिल्कुल न करें।
गुप्त नवरात्रि की साधना और अनुष्ठान की बातें किसी बाहरी व्यक्ति से साझा न करें, क्योंकि गुप्त नवरात्रि में गोपनीयता का विशेष महत्व होता है।