Bhadrapada Amavasya Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या या पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। पूरे साल में आने वाली 12 अमावस्या तिथियों में भाद्रपद अमावस्या का विशेष स्थान है। शास्त्रानुसार, इस दिन पूरे वर्ष भर के धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ, पिंडदान और तर्पण के लिए इस दिन पवित्र 'कुश' (एक विशेष प्रकार की घास) को जड़ सहित तोड़कर जमा किया जाता है। इस दिन तोड़ी गई कुश पूरे एक वर्ष तक पवित्र और उपयोग योग्य मानी जाती है।
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि पितरों को समर्पित है और इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान के बाद पितृ तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। भाद्रपद अमावस्या के दिन तोड़ी जाने वाली कुशा घास का विशेष धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुश घास की जड़ में भगवान ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु और अग्रभाग नोक में भगवान शिव का वास माना गया है। यह अमावस्या पितरों की शांति, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसके ठीक बाद पितृ पक्ष (श्राद्ध) का आगमन होता है।
भाद्रपद अमावस्या 2026 सही तारीख
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से शुरू हो रही है और यह 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो 11 सितंबर को भाद्रपद की अमावस्या तिथि में सूर्योदय सुबह में 06:04 ए एम पर होगा, इसलिए भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को होगी। लेकिन उस दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि नहीं होगा क्योंकि अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे ही खत्म हो जा रही है।
ऐसे में भाद्रपद की दर्श अमावस्या 10 सितंबर को है। दर्श अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाएगा। इस दिन कुशा ग्रहण करने की परंपरा को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। 11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या का स्नान और दान होगा।
10 सितंबर को दर्श अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कार्य सुबह में 11:30 बजे से करें और दोपहर 02:30 बजे तक उसे पूर्ण कर लें। इस दिन ही पितरों के लिए पंचबलि कर्म, ब्राह्मण भोज आदि किया जा सकता है।
भाद्रपद अमावस्या 2026 स्नान मुहूर्त
11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सबसे उत्तम समय होता है। भाद्रपद अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त 04:32 ए एम से 05:18 ए एम तक है। इसके बाद अपनी क्षमता के अुनसार दान करें।
अमावस्या के दिन अपने सामर्थ्य अनुसार करें दान
अमावस्या के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ आदि का दान करने की परंपरा है। शाम के समय घर की साफ-सफाई कर दीपक जलाने और मां लक्ष्मी का स्मरण करने की भी मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार साफ-सुथरा और सात्त्विक वातावरण घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
इस बार कुशाग्रहणी अमावस्या पर कुशा ग्रहण करने की विधि और उससे जुड़े नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है।