Bhadrapada Teej Chaturthi Vrat 2026: भाद्रपद हिंदू कैलेंडर का छठा महीना है। 28 अगस्त को रक्षा बंधन के पर्व के साथ सावन का महीना समाप्त हो चुका है और भाद्रपद का माह शुरू हो चुका है। इस माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि को कजरी तीज और बहुला चौथ के साथ ही हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस साल यह तीनों व्रत एक साथ एक ही दिन किए जाएंगे। तीन व्रतों का एक साथ महासंयोग 31 अगस्त को बन रहा है। इस दिन कजरी तीज और बहुला चौथ के साथ ही हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा।
कैसे बना 31 अगस्त को दुर्लभ संयोग
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त, रविवार को सुबह 9.38 बजे शुरू होगी और 31 अगस्त, सोमवार को सुबह 8.52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को करना शास्त्र सम्मत होगा। वहीं, भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी तिथि के दिन बहुला चतुर्थी का व्रत करने वाली माताएं शाम को चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं। चतुर्थी तिथि 31 अगस्त को सुबह 8.53 बजे शुरू होकर 01 सितंबर, मंगलवार, को सुबह 07.42 बजे समाप्त होगी। ऐसे में, चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन का संयोग 31 अगस्त को बन मिल रहा है। इसलिए बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टि चतुर्थी व्रत भी इस दिन किया जाएगा।
कजरी तीज : सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी : विघ्नहर्ता भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरूप की पूजा की जाती है और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
सोमवार, 31 अगस्त 2026 का पंचांग
भाद्रपद माह कृष्ण पक्ष तिथि : सुबह 8:52 बजे तक तृतीया तिथि, इसके पश्चात चतुर्थी तिथि शुरू
नक्षत्र : रेवती (रात 3:23 बजे तक, 1 सितंबर), इसके बाद अश्विनी
सूर्योदय : सुबह 05:58 बजे
सूर्यास्त : शाम 06:44 बजे
31 अगस्त 2026 शुभ और अशुभ समय
अभिजित मुहूर्त (शुभ): दोपहर 11:55 बजे से 12:46 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:28 बजे से 05:13 बजे तक
राहुकाल (अशुभ): सुबह 07:34 बजे से 09:09 बजे तक
यमगण्ड काल : सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक
गुलिक काल : दोपहर 01:57 बजे से शाम 03:33 बजे तक