पौराणिक कथा के अनुसार एक बार यम और यमनी ऐसे व्यक्ति को यमलोक पहुंचाने के लिए खोज रहे थे, जिसे उसकी बहन द्वारा गाली या श्राप नहीं दिया गया हो। तभी दोनों को एक ऐसा व्यक्ति मिला, जिसको ना तो उसकी बहन ने कभी गाली दी ना ही कभी श्राप दिया था। वह बहन अपने भाई से बेहद प्रेम करती थी, लेकिन यम और यमी उसके भाई की आत्मा को ले जाने उसके घर पहुंच जाते हैं। उसकी बहन को जब ये बात पता चलती है तो वह अपने भाई को बचाने की पूरी कोशिश करती है। उसने बिना वजह अपने भाई को खूब गालियां देनी शुरू कर दी और उसे मरने का श्राप दिया। ये देख यम और यमी को अपना उद्देश्य विफल होता लगा तो यम उसके भाई के प्राण लेने की कोशिश करने लगे। उन्होंने पहले उसके भाई पर दीवार गिराया, उसके ऊपर सांप और बिच्छू छोड़े, लेकिन हर बार बहन ने अपने भाई के प्राण बचा लिए। तभी से इस त्योहार पर भाई को श्राप देने की परंपरा चली आ रही है। बहनें पहले भाइयों को श्राप देती हैं और बाद में अपनी जीभ पर बबूल का कांटा चुभाकर उसका प्रायश्चित करती हैं। इसके बाद सब मिल कर गोधन कुटाई करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से यम-यमी और यम लोक के प्राणी भाग जाते है।