Bhanu Saptami 2026: कब किया जाएगा भानु सप्‍तमी का व्रत? जानें, सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Bhanu Saptami 2026: हिंदू धर्म में भगवान सूर्य की प्रत्‍यक्ष देवता के रूप में पूजा की जाती है। विभ‍िन्‍न पर्व और त्‍योहारों के अलावा भानु सप्‍तमी के दिन भी सूर्य की पूजा की जाती है। यह पर्व अत्‍यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। आइए जानें भानु सप्‍तमी की तारीख

अपडेटेड Jun 05, 2026 पर 6:05 PM
इस साल ज्‍येष्‍ठ अधिक मास के कृष्‍ण पक्ष में भानु सप्‍तमी का दुर्लभ संयोग बना है।

Bhanu Saptami 2026: हिंदू धर्म में सूर्य देव का अहम स्‍थान है। इन्‍हें संतान, सेहत, ऊर्जा और जीवन का आधार माना गया है। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, सूर्य देव अकेले प्रत्‍यक्ष देव हैं, जिनकी स्‍थ‍िति हर शुभ कार्यों में देखी जाती है। भारत में छठ पर्व सहित कई प्रमुख व्रत और पर्व भगवान सूर्य को समर्पित हैं। इन्‍हीं में से एक है भानु सप्‍तमी। हिंदू कैलेंडर के किसी भी माह के कृष्‍ण या शुक्‍ल पक्ष में जब भी सप्‍तमी तिथ‍ि रविवार के दिन पड़ती है, तब भानु सप्‍तमी का पर्व मनाया जाता है।

इस साल ज्‍येष्‍ठ अधिक मास के कृष्‍ण पक्ष में भानु सप्‍तमी का दुर्लभ संयोग बना है। अध‍िक मास तीन साल में एक बार आता है। वहीं, किसी भी माह में जब भी शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे भानु सप्तमी (या रवि सप्तमी) कहा जाता है। चूंकि रविवार सूर्य देव का दिन है और सप्तमी तिथि भी उन्हीं को समर्पित है, इसलिए इस दिन का महत्व बहुत बढ़ जाता है।

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य उपासना करने से व्यक्ति को मान-सम्मान, सफलता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है, जिससे जीवन की कई बाधाएं दूर होने लगती हैं। इससे पहले फरवरी 2026 में इस साल की पहली भानु सप्तमी (रथ सप्तमी) 8 फरवरी को मनाई जा चुकी है।

भानु सप्तमी 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ अधिकमास में आने वाली भानु सप्तमी की तिथि इस प्रकार है :

भानु सप्तमी तिथि : 07 जून 2026, रविवार


सप्तमी तिथि प्रारंभ : 07 जून 2026 को प्रातः 02:41 बजे से

सप्तमी तिथि समाप्त : 08 जून 2026 को प्रातः 03:25 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:02 बजे से 04:42 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:52 बजे से 12:48 बजे तक

द्विपुष्कर योग (विशेष फलदायी): सुबह 05:23 बजे से 07:55 बजे तक

भानु सप्तमी पूजा विधि

भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव की आराधना करने से आरोग्य, मान-सम्मान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसकी सरल पूजा विधि नीचे दी गई है :

  • भानु सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले (ब्रह्म मुहूर्त में) उठें। स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और लाल चंदन मिलाना शुभ माना जाता है।
  • साफ या तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें। उसमें लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत (चावल) और लाल रंग के फूल डालें। सूर्योदय के समय सूर्य देव के सामने खड़े होकर उन्हें अर्घ्य दें।
  • अर्घ्य देते समय "ॐ सूर्याय नमः" या "ॐ घृणि सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें। इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
  • सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद घर के मंदिर में धूप-दीप जलाएं। भगवान सूर्य नारायण को गेहूं से बनी चीजें या खीर का भोग लगाएं।
  • भानु सप्तमी के दिन दान का बहुत बड़ा महत्व है। पूजा के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को गेंहू, तांबा, गुड़, लाल कपड़े या मसूर की दाल का दान करें।
  • यदि आप इस दिन व्रत रख रहे हैं, तो याद रखें कि इस दिन नमक का सेवन नहीं किया जाता। आप फलहार या बिना नमक का मीठा भोजन कर सकते हैं।

भानु सप्तमी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है। इससे नौकरी और बिजनेस में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है और त्वचा संबंधी रोगों व अन्य शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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