Chaturmas 2026: जानें कब से लग रहा है चातुर्मास, सही तारीख, महत्व और नियम क्या हैं? इस दिन रुक जाएंगे मांगलिक कार्य

Chaturmas 2026: हिंदू धर्म में चातुर्मास का अहम स्थान है। इस अवधि में शादी-मुंडन आदि मांगलिक नहीं किए जाते हैं। यह महीना आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्व्पूर्ण माना जाता है। आइए जानें इस साल चातुर्मास कब से लग रहा है, इसका महत्व और नियम क्या हैं

अपडेटेड Jul 02, 2026 पर 6:59 PM
चातुर्मास के अंतर्गत हिंदू कैलेंडर के चार पवित्र महीने श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक आते हैं।

Chaturmas 2026: हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस अवधि में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। लेकिन, इस समय को पूजा, जप और आत्मिक शुद्धि के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह चार महीने की वह अवधि है जब भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है।

चातुर्मास का अर्थ है चार महीने का समय। इसलिए चातुर्मास के अंतर्गत हिंदू कैलेंडर के चार पवित्र महीने श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक आते हैं। इसकी शुरुआत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से होती है, जिसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। वहीं, इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवउठनी एकादशी के दिन होता है। आइए जानें इस साल कब से कब तक रहेगा चातुर्मास

चातुर्मास 2026 की सही तारीख

द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चातुर्मास की अवधि निम्नलिखित है:

चातुर्मास प्रारंभ : 25 जुलाई 2026 (शनिवार) – देवशयनी एकादशी के दिन से।

चातुर्मास समापन : 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) – देवउठनी एकादशी के दिन।


कुल अवधि : लगभग 119 दिन।

चातुर्मास का महत्व

चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु इस समय योग निद्रा में रहते हैं, इसलिए यह समय सांसारिक कार्यों से ध्यान हटाकर ईश्वर भक्ति, ध्यान, जप और तपस्या में लगाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाती है।

वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टि से यह समय मानसून (वर्षा ऋतु) का होता है। इस मौसम में संक्रमण का खतरा अधिक होता है और पाचन क्रिया कमजोर पड़ जाती है। इसलिए इस दौरान संयमित जीवनशैली और खानपान का पालन किया जाता है।

चातुर्मास के मुख्य नियम

चातुर्मास के दौरान खानपान, आचरण और दैनिक दिनचर्या को लेकर शास्त्रों में कड़े नियम बताए गए हैं:

चातुर्मास में ये काम बिलकुल न करें

  • शादी-ब्याह, सगाई या कोई भी बड़ा शुभ कार्य न करें।
  • लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह से त्याग दें।
  • अगर आपका स्वास्थ्य अनुमति दे, तो इस दौरान विलासिता को त्यागकर जमीन पर सोना चाहिए।
  • झूठ बोलना, निंदा करना, किसी का अपमान करना और क्रोध करने से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन करें।

ये काम करेंगे तो होगा मंगल ही मंगल

  • रोजाना सुबह-शाम भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करें। सत्यनारायण कथा सुनना और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • इस समय जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, छाता और जूते-चप्पल दान करने का बड़ा महत्व है।
  • चातुर्मास के दौरान आने वाली सभी एकादशी तिथियों का व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है। बहुत से लोग एक समय भोजन (एकभुक्त) का नियम भी लेते हैं।

चातुर्मास में खानपान के नियम

  • सावन में हरी पत्तेदार सब्जियां (साग, पालक आदि) नहीं खानी चाहिए।
  • भाद्रपद में दही या कढ़ी आदि दही से बनी चीजों का सेवन वर्जित होता है।
  • आश्विन में दूध और दूध से बने उत्पादों का त्याग करना चाहिए।
  • कार्तिक में प्याज, लहसुन के साथ-साथ उड़द, मसूर और चना दाल और राई का सेवन नहीं करना चाहिए।

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